पिहोवा में 15 जून से घर-घर आएंगे बीएलओ, हर वोटर के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म भरना जरूरी
Jun 08, 2026 6:36 PM
पिहोवा(अभिषेक पूर्णिमा) हरियाणा निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पिहोवा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूचियों को पूरी तरह त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी ने कमर कस ली है। पिहोवा के एसडीएम एवं निर्वाचक पंजीयन अधिकारी अमन कुमार ने सोमवार को उपमंडल कार्यालय में बुलाई गई एक प्रेस वार्ता में इस विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की।
एसडीएम ने साफ किया कि इस बार चुनावी सूचियों में नाम दर्ज होना ही काफी नहीं होगा, बल्कि ड्राफ्ट रोल में शामिल हर एक मतदाता को अपनी नागरिकता और पते की पुष्टि के लिए 'एन्यूमरेशन फॉर्म' भरना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साल 2002 के बाद अब जाकर इतने बड़े पैमाने पर डेटा वेरिफिकेशन का काम शुरू किया जा रहा है।
15 जून से शुरू होगा जमीनी सर्वे, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प खुले
प्रशासनिक शेड्यूल के मुताबिक, पिहोवा विधानसभा के सभी 1,89,104 मतदाताओं को इस प्रक्रिया के दायरे में लाया जाएगा। 15 जून से शुरू होकर 14 जुलाई तक चलने वाले इस एक महीने के अभियान के दौरान बीएलओ हर वार्ड और गांव के प्रत्येक घर में दस्तक देंगे। नागरिक इस प्रक्रिया में ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी हिस्सा ले सकते हैं।
वोटर चाहें तो खुद बीएलओ को फॉर्म सौंप सकते हैं या अपनी राजनीतिक पार्टियों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) के जरिए भी इसे जमा करवा सकते हैं। जो लोग नौकरी या व्यवसाय के सिलसिले में शहर या गांव से बाहर रहते हैं, उनके परिजन भी उनकी तरफ से यह फॉर्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं। इस फील्ड एक्सरसाइज को सुचारू रूप से चलाने के लिए 5 जून से 14 जून तक सभी बीएलओ को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
2002 के डेटा से मिलान और आपत्तियों के निपटारे का पूरा गणित
एसडीएम अमन कुमार ने इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के तकनीकी पहलुओं को समझाते हुए कहा कि जिन नागरिकों के वोट साल 2002 में बने हुए थे, उन्हें अपना वही पुराना डेटा फॉर्म में भरना होगा। वहीं, जिन युवाओं या नागरिकों के वोट 2002 के बाद बने हैं, उन्हें अपने परिवार के बुजुर्गों (माता-पिता या दादा-दादी) का तत्कालीन चुनावी रिकॉर्ड लिंक करना होगा। इस सुविधा के लिए वर्ष 2002 की मूल वोटर लिस्ट मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) हरियाणा और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दी गई है, जहां से इसे डाउनलोड किया जा सकता है।
दावे और आपत्तियों की समय-सीमा:
21 जुलाई: विशेष सर्वे के बाद शुरुआती ड्राफ्ट रोल का प्रकाशन किया जाएगा।
20 अगस्त: मतदाता अपने नाम, पते या फर्जी वोटों को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
अपील का पदानुक्रम: पहली शिकायत आरओ/एसडीएम स्तर पर होगी। वहां समाधान न होने पर जिला राजस्व अधिकारी (DRO)/उपायुक्त और अंत में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (EO) के पास अपील की जा सकती है।
22 सितंबर: 21 जुलाई से 18 सितंबर तक सभी विवादों की सुनवाई पूरी कर 22 सितंबर को 'अंतिम मतदाता सूची' जारी कर दी जाएगी।
मतदान केंद्रों का रेशनलाइजेशन भी होगा साथ
इस अभियान के दौरान केवल वोटरों का ही मिलान नहीं होगा, बल्कि मतदान केंद्रों (पोलिंग बूथों) के रेशनलाइजेशन यानी युक्तिकरण की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बूथ पर मतदाताओं की संख्या अत्यधिक न हो और लोगों को वोट डालने के लिए लंबी दूरी न तय करनी पड़े। एसडीएम ने आम जनता से अपील की है कि वे लोकतंत्र के इस शुद्धीकरण अभियान में प्रशासन का पूरा सहयोग करें। किसी भी तरह की शंका या असुविधा होने पर नागरिक चुनाव आयोग के राष्ट्रीय टोल-फ्री नंबर 1950 पर कॉल कर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकते हैं।