खेल महोत्सव 2026: गुरुकुल कुरुक्षेत्र के छात्र ने मल्लखंभ में दिखाई ताकत, चंडीगढ़ में मिला सम्मान
May 09, 2026 3:28 PM
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र की धरती अब केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि खेल के मैदान में भी अपनी पारंपरिक जड़ों के साथ नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में आयोजित 'पांचवें भारतीय पारंपरिक खेल व खेलकूद महोत्सव' में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के होनहार छात्र वत्सल आर्य ने मल्लखंभ की पोल पर हैरतअंगेज करतब दिखाकर प्रदेश भर में तीसरा स्थान हासिल किया है। 1 से 3 मई तक चले इस प्रतिष्ठित महोत्सव में वत्सल की फुर्ती और संतुलन ने जजों के साथ-साथ दर्शकों को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
पारंपरिक खेलों का महाकुंभ: वत्सल का शानदार सफर
खेलो इंडिया और पंजाब यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस खेल महोत्सव का मुख्य उद्देश्य लुप्त हो रहे भारतीय खेलों को पुनर्जीवित करना था। कैंपस में जब मल्लखंभ की स्पर्धा शुरू हुई, तो वत्सल आर्य ने अपनी कड़ी मेहनत और कोच अनिल आर्य के मार्गदर्शन का बेहतरीन परिचय दिया। उनकी इस उपलब्धि पर पंजाब के पूर्व एडवोकेट जनरल अनमोल रत्न सिद्धू ने उन्हें मंच पर सम्मानित किया। इस महोत्सव में केवल मल्लखंभ ही नहीं, बल्कि गतका, मल्लयुद्ध, गिल्ली-डंडा, लाठी और योग जैसे 15 से अधिक खेलों में खिलाड़ियों ने अपना दमखम दिखाया।
गुरुकुल में जश्न: विजेताओं का भव्य स्वागत
वत्सल की इस कामयाबी की खबर जैसे ही कुरुक्षेत्र पहुंची, गुरुकुल परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग, निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार और प्राचार्य सूबे प्रताप ने वत्सल और उनके कोच अनिल आर्य का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया। व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने भी छात्र की पीठ थपथपाई। ब्रिगेडियर डॉ. प्रवीण कुमार ने इस दौरान खेलों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में जहां बच्चे स्क्रीन की दुनिया में खोए हैं, वहां वत्सल जैसे खिलाड़ी पारंपरिक खेलों के जरिए अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति का लोहा मनवा रहे हैं।
अनुशासन और टीम भावना की जीत
निदेशक ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह छात्र के भीतर टीम भावना और आपसी भाईचारे की नींव रखता है। गुरुकुल कुरुक्षेत्र लगातार अपने छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ इन प्राचीन विधाओं में भी निपुण बना रहा है। वत्सल की इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और अनुशासन मिले, तो पारंपरिक खेलों में भी करियर और पहचान दोनों बनाई जा सकती है। फिलहाल, वत्सल की इस सफलता ने आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए कुरुक्षेत्र की उम्मीदें जगा दी हैं।