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रोहतक में बवाल: सीटू नेता के घर आधी रात को क्राइम ब्रांच की रेड, सामाजिक संगठनों ने घेरा डीसी दफ्तर

May 09, 2026 3:49 PM

रोहतक। रोहतक की सियासत और मजदूर आंदोलनों के बीच पुलिस की एक छापेमारी ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। सीटू नेता विनोद देशवाल के घर मानेसर क्राइम ब्रांच द्वारा की गई 'मिडनाइट रेड' के विरोध में आज जिले के तमाम सामाजिक और किसान संगठन सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का सीधा आरोप है कि सरकार संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर पुलिस के जरिए मजदूरों की आवाज कुचलना चाहती है। शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए यह विरोध जुलूस उपायुक्त कार्यालय पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

आधी रात का वो खौफनाक मंजर

सीटू के जिला सचिव विनोद देशवाल ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि 4 मई की रात करीब डेढ़ बजे कुछ लोग दीवार फांदकर उनके घर में दाखिल हुए। उस वक्त घर में केवल उनकी पत्नी और 6 साल की मासूम बच्ची थी। विनोद के मुताबिक, "आने वाले लोग सिविल ड्रेस में थे और बिना नंबर की गाड़ी लेकर आए थे। उनके पास न तो कोई सर्च वारंट था और न ही कोई पहचान पत्र।" परिजनों को घंटों डराया-धमकाया गया और पूछताछ के नाम पर बंधक जैसी स्थिति पैदा कर दी गई। काफी दबाव के बाद उन लोगों ने खुद को मानेसर क्राइम ब्रांच का हिस्सा बताया।

मजदूरों के आंदोलन को कुचलने की साजिश?

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान सभा के नेता प्रीत सिंह और सुमित दलाल ने दो टूक कहा कि यह छापेमारी किसी अपराध की जांच नहीं, बल्कि मजदूर आंदोलन को डराने की एक सोची-समझी साजिश है। नेताओं का आरोप है कि पुलिस अपराधियों की तरह व्यवहार कर रही है। विनोद देशवाल ने बताया कि इस घटना के तुरंत बाद एसपी को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे साफ पता चलता है कि पुलिस को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।

12 मई को थमेगा हरियाणा: बड़े आंदोलन की चेतावनी

इस विवाद ने अब प्रदेश स्तरीय मोड़ ले लिया है। सीटू और अन्य जनसंगठनों ने ऐलान किया है कि अगर पुलिस की इस मनमानी पर रोक नहीं लगी और दोषियों को सजा नहीं मिली, तो 12 मई को पूरे हरियाणा में चक्का जाम जैसी स्थिति पैदा होगी। इस बड़े आंदोलन में प्रदेश के तमाम कर्मचारी संगठन, किसान यूनियन और मजदूर यूनियन एकजुट होकर सड़कों पर उतरेंगे। रोहतक के प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि खाकी का दुरुपयोग करके मजदूरों के संघर्ष को दबाया नहीं जा सकता और आने वाले दिनों में यह लड़ाई और तेज होगी।

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