ताबिंदा सानपाल और नीता अंबानी के स्टाइल पर छिड़ी बहस, नेटिजन्स ने सिखाया एलिगेंस का पाठ
Jun 10, 2026 12:17 PM
फैशन डेस्क। फैशन की चमचमाती दुनिया में एक आम धारणा अक्सर हावी रहती है कि आपके कपड़ों पर लगा ब्रांड का टैग, उसकी कीमत और आपकी ज्वेलरी का आकार ही आपकी स्टाइल स्टेटमेंट तय करता है। लेकिन डिजिटल दौर के सजग सोशल मीडिया यूजर्स इस सतही सोच को लगातार चुनौती दे रहे हैं। हाल ही में इंटरनेट पर बिजनेसवुमन ताबिंदा सानपाल और देश की सबसे रसूखदार महिलाओं में शुमार नीता अंबानी के फैशन सेंस को लेकर एक बेहद बारीकी से की गई तुलना वायरल हो रही है। इस बहस का मकसद किसी एक के पहनावे को कमतर दिखाना नहीं, बल्कि इस बात को समझना है कि आखिर क्यों अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी कुछ लुक्स 'लाउड' (अतिश्योक्तिपूर्ण) लगने लगते हैं और क्यों कुछ लुक्स में सादगी के साथ साख झलकती है।
ताबिंदा सानपाल का 'ब्लिंग' लुक: जब ब्रांड्स का ओवरडोज भारी पड़ जाए
ओटीटी (OTT) स्क्रीन पर 'देसी ब्लिंग शो' से अपनी पहचान बनाने वाली ताबिंदा सानपाल को करीब से जानने वाले उनके सोशल मीडिया पर नजर डालते ही समझ जाते हैं कि उन्हें ग्लैमर और चमक-दमक (ब्लिंग) से कितना लगाव है।
डिजिटल फोरम पर उनके लुक्स का विश्लेषण करते हुए यूजर्स ने लिखा:
"ताबिंदा के लगभग हर लुक में हेड-टू-टो (सिर से पैर तक) बड़े लग्जरी ब्रांड्स के लोगो, चंकी स्टेटमेंट ज्वेलरी और काफी हैवी मेकअप का कॉम्बिनेशन होता है। ग्लैमर के लिहाज से यह तस्वीरें पहली नजर में भले ही ध्यान खींचती हों, लेकिन जब एक ही फ्रेम में बहुत सारे विजुअल एलिमेंट्स एक साथ आ जाते हैं, तो आंखें किसी एक चीज पर टिक नहीं पातीं। कई बार ऐसा स्टाइलिंग पैटर्न नेचुरल दिखने के बजाय जबरन थोपा गया या 'फेक' महसूस होने लगता है।"
नीता अंबानी का स्टाइल मंत्र: रॉयल्टी और क्लासिक बैलेंस का अनूठा संगम
इसके ठीक उलट, जब बात नीता अंबानी की आती है, तो उनके पास दुनिया के सबसे दुर्लभ और बेशकीमती कस्टमाइज्ड परिधान मौजूद हैं। चाहे वह पारंपरिक बनारसी साड़ी हो, सिल्क हो या फिर दुनिया के सबसे महंगे हीरों-पन्नों का हार; उनके लुक की भव्यता जगजाहिर है। लेकिन नेटिजन्स जिस बात के मुरीद हैं, वह है उनकी 'मिनिमलिस्टिक स्टाइलिंग' (सीमित तत्वों का उपयोग)।
एक चर्चित फैशन ब्लॉगर ने इस अंतर को स्पष्ट करते हुए लिखा:
"नीता अंबानी के लुक में चाहे कितनी ही हैवी ज्वेलरी क्यों न हो, उनका मेकअप हमेशा बेहद न्यूड, सॉफ्ट और सटल रखा जाता है। उनके आउटफिट्स और एक्सेसरीज के बीच एक ऐसा मूक संवाद होता है जहां कोई भी चीज दूसरी चीज को दबाती नहीं है। यही कारण है कि उनकी सादगी में भी एक राजसी गरिमा (रॉयल्टी) और क्लासिक ग्रेस नजर आता है।"
सार: कपड़े नहीं, आपका 'कैरी' करने का अंदाज बोलता है
इंटरनेट पर चल रही यह पूरी बहस फैशन इंडस्ट्री के एक बुनियादी नियम की ओर इशारा करती है। असली स्टाइल और क्लास इस बात से तय नहीं होती कि आपने खुद पर कितना सोना या कौन सा ब्रांड लाद रखा है। स्टाइल का असली पैमाना यह है कि आप उस पहनावे को किस आत्मविश्वास और संतुलन के साथ समाज के सामने कैरी करते हैं।
फैशन की भाषा में कहें तो 'एलिगेंस' तब पैदा होती है जब आपको पता हो कि कहाँ जाकर रुकना है। सही कंट्रास्ट, संतुलित एक्सेसरीज और चेहरे की प्राकृतिक चमक को बनाए रखना ही किसी लुक को टाइमलेस (सदाबहार) बनाता है। बड़े-बुजुर्ग और फैशन डिजाइनर भी मानते हैं कि समझदारी महंगे कपड़े खरीदने में नहीं, बल्कि उन्हें अपनी शख्सियत के अनुरूप ढालने में होती है।