ढांड पुलिस की कौल गांव में बड़ी मुहिम, थाना प्रभारी पवन कुमार बोले- नशे के सौदागरों की सूचना दें, नाम रहेगा गुप्त
Jun 18, 2026 5:43 PM
ढांड (नरेश ढांडा)। नशे की बढ़ती जद और इससे बर्बाद होते युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए कैथल पुलिस अब सीधे जमीनी मोर्चे पर उतर आई है। जिला पुलिस कप्तान (एसपी) मनप्रीत सिंह सूदन की खास पहल पर ढांड थाना पुलिस इन दिनों ग्रामीण इलाकों में अलख जगाने का काम कर रही है। इसी कड़ी के तहत ढांड थाना प्रभारी और सब इंस्पेक्टर पवन कुमार अपनी पूरी टीम के साथ ऐतिहासिक गांव कौल की गलियों और चौपालों में पहुंचे। पुलिस का मकसद किसी पर कानूनी हंटर चलाना नहीं, बल्कि समाज के भीतर से ही नशे के खिलाफ एक मजबूत और स्वतः स्फूर्त दीवार खड़ी करना है।
"नशा एक महामारी, इसे मिलकर ही हरा सकते हैं"— सब इंस्पेक्टर पवन कुमार
गांव की चौपाल पर जुटे ग्रामीणों को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी पवन कुमार का अंदाज एक सख्त पुलिस अफसर जैसा नहीं, बल्कि समाज के एक फिक्रमंद सिपाही जैसा था। उन्होंने बेहद भावुक लहजे में कहा, "नशा केवल एक व्यक्ति के शरीर को नहीं मारता, बल्कि एक पूरे हंसते-खेलते परिवार की खुशियां, मां-बाप की उम्मीदें और समाज का ताना-बाना तबाह कर देता है। पुलिस अकेले हर गली पर पहरा नहीं दे सकती, इसलिए आइए हम सब मिलकर कदम बढ़ाएं और अपने गांव व जिले को इस अभिशाप से हमेशा के लिए मुक्त कराएं।" उन्होंने साफ किया कि यह सामाजिक जंग बिना जनता की सक्रिय भागीदारी के नहीं जीती जा सकती।
सूचना दीजिए बेखौफ होकर, पुलिस रखेगी आपका नाम पूरी तरह गुप्त
संवाद के दौरान ग्रामीणों के मन में तस्करों के डर और सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का भी पुलिस ने मौके पर ही समाधान किया। थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि अगर उनके आस-पास या गांव की किसी भी गली में नशे का अवैध कारोबार हो रहा है या कोई इसमें संलिप्त है, तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को दें। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा कि सूचना देने वाले किसी भी नागरिक का नाम, पता या पहचान किसी भी सूरत में उजागर नहीं होने दी जाएगी। पुलिस अपराधियों पर कड़ा कानूनी शिकंजा कसेगी, जबकि सूचना देने वाले समाज के प्रहरी बनकर सुरक्षित रहेंगे।
संस्कारों का पहरा और बच्चों की संगति पर नजर रखने की सलाह
पुलिस टीम ने इस दौरान मुख्य रूप से घर के बुजुर्गों और महिलाओं से बात की। अधिकारियों ने कहा कि बदलते दौर में बच्चों की गतिविधियों, उनके अचानक बदलते व्यवहार, जेब खर्च और उनकी संगति पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है। अगर हम शुरुआत में ही बच्चों को सही संस्कार देंगे और उनकी गलत आदतों को टोकेंगे, तो उन्हें इस दलदल में गिरने से बचाया जा सकता है। पुलिस के इस आत्मीय और कड़े रुख को देखते हुए गांव कौल के प्रबुद्ध नागरिकों ने भी प्रशासन को इस मुहिम में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने का पूरा भरोसा दिया है।