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Kaithal News : गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर कैथल रोड पर लगी मीठे पानी की छबील

Jun 18, 2026 5:30 PM

राजौंद। (नरेश कुमार) जून के इस महीने में आसमान से बरसती आग और थपेड़े मारती लू ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। गला सुखा देने वाली इस भीषण गर्मी के बीच कैथल के राजौंद इलाके से मानवता और सुकून देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। गुरुवार को गुरुद्वारा सिंह सभा कमेटी राजौंद की ओर से पांचवें पातशाही श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी पर्व के उपलक्ष्य में कैथल रोड पर एक विशाल छबील (मीठे पानी का लंगर) लगाई गई। इस सेवा कार्य के दौरान जाति-पाति के भेद से ऊपर उठकर हर आने-जाने वाले मुसाफिर को बड़े ही आदर और सत्कार के साथ शीतल जल ग्रहण कराया गया।

गुरु महाराज का बलिदान और सेवा की सीख: प्रधान मनप्रीत सिंह

कैथल रोड हाईवे पर सुबह से ही शुरू हुई इस सेवा का नेतृत्व गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान मनप्रीत सिंह कर रहे थे। सेवादारों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, "गुरु अर्जुन देव जी का पूरा जीवन और उनकी शहादत हमें धैर्य, मानवता और निष्काम सेवा का संदेश देती है। उन्होंने तपती तवी पर बैठकर भी 'तेरा भाणा मीठा लागे' का उच्च आदर्श संसार के सामने रखा था। इस झुलसा देने वाली धूप में किसी प्यासे कंठ को तृप्त करना ही सच्ची गुरु-सेवा और सबसे बड़ा पुण्य है। गुरु महाराज की कृपा से यह सेवा आगे भी इसी तरह अनवरत जारी रहेगी।"

मुसाफिरों ने रोका सफर, ठंडी फुहार से बुझाई कंठ की प्यास

सड़क पर उड़ती धूल और सूरज की तीखी किरणों के बीच कैथल रोड से गुजरने वाले हर राहगीर, साइकिल सवार, कार और बस यात्रियों को सेवादारों ने हाथ जोड़कर रोका। बड़े-बड़े बर्तनों में बर्फ और रूहअफजा के मिश्रण से तैयार हो रहा ठंडा-मीठा पानी जैसे ही मुसाफिरों तक पहुंचा, उनके चेहरों की थकान पल भर में गायब हो गई। स्थानीय दुकानदारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी सिख समाज के इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना की। लोगों का कहना था कि जब सरकारें और प्रशासन राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करने में नाकाम रहते हैं, तब ऐसी धार्मिक संस्थाएं आगे आकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम करती हैं।

सेवा में जुटे रहे संगत के गुर्गे और गणमान्य नागरिक

इस पुनीत कार्य को सफल बनाने के लिए गुरुद्वारा कमेटी के सेवादारों ने सुबह तड़के से ही अपनी तैयारियां शुरू कर दी थीं। छबील के इस सेवा कार्य में न केवल युवा बल्कि बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी हाजिरी लगवाई। इस मौके पर मुख्य रूप से अमनदीप सिंह, गुरमुख सिंह, सुखदेव सिंह, हरपाल सिंह, स्थानीय पार्षद कर्म सिंह, पंजाब सिंह सहित बड़ी संख्या में सिख संगत और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने दोपहर ढलने तक पूरी निष्ठा के साथ इस खामोश क्रांति में अपना योगदान दिया।

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