CM Saini Panchkula: हरियाणा में स्कूली बच्चे अब पढ़ेंगे सिख गुरुओं का इतिहास, पंचकूला में सीएम नायब सैनी का बड़ा ऐलान
Jun 18, 2026 5:53 PM
पंचकूला। चंडीगढ़ और पंचकूला के मुहाने पर बसे श्री माता मनसा देवी और श्री नाडा साहिब की इस पावन धरा पर गुरुवार को एक अलग ही आध्यात्मिक छटा बिखरी हुई थी। अवसर था सिखों के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी के 420वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय समारोह का। इस गरिमामयी मंच से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरु साहिब के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए स्पष्ट किया कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को यह जानना ही होगा कि आज हम जिस स्वतंत्र आबोहवा में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे हमारे गुरुओं के लहू की कितनी लंबी दास्तान है।
तपती तवी पर बैठकर सामाजिक समरसता का ताना-बाना बुनने वाले 'योगेश्वर'
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में तत्कालीन मुगलिया सल्तनत के क्रूर दमन चक्र का जिक्र करते हुए कहा कि जहांगीर की सत्ता गुरु साहिब के बढ़ते आध्यात्मिक प्रभाव से भयभीत हो उठी थी। लाहौर की जेल में गुरु साहिब को बंदी बनाकर जो अमानवीय यातनाएं दी गईं—चाहे वह तपती तवी पर बिठाना हो या जिस्म पर खौलती रेत डालना—वह क्रूरता की पराकाष्ठा थी। लेकिन, धन्य था वह आत्मबल कि गुरु साहिब के माथे पर एक शिकन तक न आई और उन्होंने परमात्मा के विधान को सहर्ष स्वीकार किया।
नायब सिंह सैनी ने रेखांकित किया कि गुरु अर्जन देव जी केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक भारत के सामाजिक समरसता के सबसे बड़े शिल्पकार थे। उन्होंने अमृतसर में 'श्री हरमंदिर साहिब' (स्वर्ण मंदिर) की नींव रखते समय उसके चारों दिशाओं में चार दरवाजे बनवाए, जो इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि ईश्वर का घर किसी जाति, वर्ण या मजहब के लिए बंद नहीं है। यही नहीं, 'श्री गुरु ग्रंथ साहिब' का संपादन करते हुए उन्होंने संत कबीर, बाबा फरीद, संत नामदेव और संत रविदास जैसे महापुरुषों की वाणी को एक जगह संकलित कर 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के विचार को सदियों पहले जमीन पर उतारा था।
घोषणाओं से आगे जमीनी काम: यमुनानगर मेडिकल कॉलेज अब गुरु तेग बहादुर के नाम
भाषणों के इतर हरियाणा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर चलते हुए सूबे में सिख इतिहास को सहेजने का काम युद्ध स्तर पर जारी है:
शिक्षा में सुधार: आठवीं कक्षा के छात्र अब किताबों में हमारे वीरों और गुरुओं के बलिदान की गाथाएं पढ़ेंगे।
संस्थागत सम्मान: यमुनानगर में बन रहे नए मेडिकल कॉलेज का नाम 'श्री गुरु तेग बहादुर सिंह जी' के नाम पर रखा गया है। इसी तरह अंबाला के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक और टोहाना-जींद मार्ग का नामकरण भी नौवें गुरु के सम्मान में किया गया है।
चिल्ला साहिब की जमीन: सिरसा स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चिल्ला साहिब की करीब 9 एकड़ जमीन को बिना किसी शुल्क के गुरुद्वारा साहिब के नाम ट्रांसफर करने का ऐतिहासिक काम पूरा हो चुका है।
लंगर की परंपरा में छिपा है 'सबका साथ, सबका विकास' का मूल मंत्र
कार्यक्रम के दौरान जहां एक तरफ गुरु साहिब के जीवन पर आधारित एक मर्मस्पर्शी डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई, वहीं मुख्यमंत्री ने खुद पंडाल में पहुंचकर श्रद्धालुओं को छबील (मीठा पानी) वितरित कर सेवा की। उन्होंने कहा कि गुरुओं द्वारा स्थापित की गई लंगर और पंगत की परंपरा यह सिखाती है कि राजा हो या रंक, सब एक ही कतार में बैठेंगे। आज केंद्र सरकार का 'सबका साथ, सबका विकास' का दर्शन भी इसी समतावादी सोच की उपज है।
इस राज्य स्तरीय आयोजन में पंजाब और हरियाणा से आए सिख समाज के संतों, निहंग जत्थेबंदियों और महापुरुषों ने मुख्यमंत्री का आभार जताया। मंच पर हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा, पूर्व स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार जगदीश सिंह झींडा, ज्ञानी हरप्रीत सिंह और ओएसडी डॉ. प्रभलीन सिंह सहित क्षेत्र के तमाम आला अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।