Mohali News: मोहाली में वेरका की नई पहल, वेंडिंग मशीन से दूध खरीदने पर मिलेगा ₹2 प्रति लीटर सस्ता दूध, क्वालिटी सेम रहेगी
Jun 08, 2026 12:29 PMमोहाली: मोहाली में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण board (PPCB) और वेरका मिल्क प्लांट ने प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक नई पहल की शुरुआत की है। इस योजना के तहत अब उपभोक्ता वेंडिंग मशीन से दूध खरीदकर प्रति लीटर 2 रुपये की बचत कर सकेंगे। इसके लिए ग्राहकों को अपने घर से बर्तन, बोतल या अन्य कंटेनर लेकर आना होगा। अधिकारियों का कहना है कि वेंडिंग मशीन से मिलने वाला दूध उसी गुणवत्ता और ताजगी का होगा, जो पैकेट वाले दूध में उपलब्ध होती है।
इस पहल की शुरुआत मोहाली स्थित एटीएस कासा एस्पाना सोसाइटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की गई। कार्यक्रम में PPCB और वेरका मिल्क प्लांट के अधिकारियों ने मोबाइल मिल्क वेंडिंग वैन को लॉन्च किया। फिलहाल यह परियोजना पायलट आधार पर इसी सोसाइटी में शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार वेंडिंग मशीन की क्षमता 300 लीटर दूध की है। यह मोबाइल वैन प्रतिदिन सुबह और शाम दो बार सोसाइटी में पहुंचेगी, जिससे निवासियों को ताजा दूध आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
प्लास्टिक कचरा कम करने पर फोकस
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का मानना है कि प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए लोगों की उपभोग आदतों में बदलाव आवश्यक है। दूध के पाउच बड़े स्तर पर सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरा पैदा करते हैं, जिसे कम करने के लिए यह मॉडल विकसित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि लोग सीधे कंटेनर में दूध खरीदते हैं तो प्लास्टिक पैकेजिंग की आवश्यकता कम होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कचरा प्रबंधन की चुनौती भी कम होगी।
इस योजना को ‘दूध वही, प्लास्टिक नहीं’ अभियान के तहत शुरू किया गया है। वेंडिंग मशीन से खरीदे गए दूध की कीमत 64 रुपये प्रति लीटर रखी गई है। वहीं, वर्तमान में प्लास्टिक पाउच में मिलने वाले वेरका दूध की कीमत 66 रुपये प्रति लीटर है। इस प्रकार उपभोक्ताओं को प्रति लीटर 2 रुपये की सीधी बचत होगी। साथ ही उन्हें अपने घर के नजदीक ताजा और स्वच्छ दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
सफल होने पर अन्य सोसाइटियों में भी विस्तार
अधिकारियों ने बताया कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे मोहाली की अन्य आवासीय सोसाइटियों में भी लागू किया जाएगा। इसके बाद पंजाब के अन्य शहरों और कस्बों तक भी इस मॉडल का विस्तार करने की योजना है। इसके लिए अतिरिक्त मोबाइल वेंडिंग वैन शुरू की जा सकती हैं या वेरका के मौजूदा बिक्री केंद्रों पर स्थायी वेंडिंग यूनिट स्थापित की जा सकती हैं। इससे अधिक लोगों को इस पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।
वेरका और PPCB के अधिकारियों के मुताबिक यदि 300 लीटर क्षमता वाली मशीन पूरी तरह संचालित होती है तो एक सोसाइटी में प्रतिदिन लगभग 600 प्लास्टिक पाउचों के उपयोग को रोका जा सकता है। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि कोई परिवार प्रतिदिन 2 लीटर दूध वेंडिंग प्रणाली से खरीदता है, तो वह एक वर्ष में लगभग 4 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा होने से बचा सकता है। यही इस पहल का सबसे बड़ा पर्यावरणीय लाभ माना जा रहा है।