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Panipat Fake Petrol: पानीपत रिफाइनरी के पास नकली पेट्रोल बनाने की फैक्टरी पकड़ी, एथेनॉल मिलाकर बेच रहे थे ईंधन

Jun 18, 2026 2:42 PM

पानीपत। पानीपत की सदर थाना पुलिस और सीआईए-1 की टीम ने रिफाइनरी रोड पर चल रहे एक ऐसे गोरखधंधे को बेनकाब किया है, जो न सिर्फ सरकारी राजस्व को चूना लगा रहा था, बल्कि आम जनता के वाहनों के इंजन को भी गुपचुप तरीके से तबाह कर रहा था। पुलिस ने बुधवार देर रात एडीबी रिसॉर्ट के पास स्थित एक फैक्टरी में दबिश देकर एथेनॉल और चोरी के पेट्रोल के मिश्रण से तैयार हो रहे नकली ईंधन के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ किया। यह पूरी मिलावट पानीपत रिफाइनरी से निकलने वाले टैंकरों से सांठगांठ कर अंजाम दी जा रही थी।

रिफाइनरी के टैंकरों से होती थी सेंधमारी, कुरुक्षेत्र से लेकर बिहार तक जुड़े तार

मुखबिर की पुख्ता सूचना पर जब सीआईए की टीम ने फैक्टरी परिसर के भीतर अचानक रेड की, तो वहां अफरा-तफरी मच गई। मौके पर रिफाइनरी से निकला एक बड़ा तेल टैंकर खड़ा हुआ था, जिससे ईंधन निकाला जा रहा था। पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए कुरुक्षेत्र के पिपली निवासी टैंकर चालक संदीप को रंगे हाथों दबोच लिया। इसके साथ ही फैक्टरी के भीतर मिलावट के काम में जुटे बिहार के औरंगाबाद निवासी तीन अन्य कारिंदों—अक्षय पासवान, सुरेंद्र पासवान और राजू को भी गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों ने कबूला कि वे यहां बड़े पैमाने पर मिलावटी पेट्रोल तैयार कर उसे गुपचुप तरीके से खुले बाजार में खपाते थे।

25 ड्रमों में भरा था 'मौत का कॉकटेल', फैक्टरी सील

थाना सदर प्रभारी गुलशन के मुताबिक, फैक्टरी के भीतर का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। वहां रासायनिक उपकरणों और ड्रमों का पूरा जाल बिछा हुआ था। पुलिस ने तलाशी के दौरान करीब 25 लोहे और प्लास्टिक के ड्रमों में भरा हुआ लगभग 5000 लीटर मिश्रित नकली पेट्रोल और भारी मात्रा में एथेनॉल बरामद किया। पुलिस ने सुरक्षा और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए तुरंत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को सूचित किया और पूरी फैक्टरी को सरकारी सील लगा कर बंद कर दिया है।

फैक्टरी मालिक बिजेंद्र 'किंगपिन', 15 दिन पहले भी मिला था नकली तारकोल

इस पूरे रैकेट का मुख्य मास्टरमाइंड करनाल के घरौंडा (शेखपुरा) का रहने वाला बिजेंद्र बताया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह फैक्टरी इलाके में मिलावटखोरी का गढ़ बन चुकी थी। महज 15 दिन पहले भी सदर थाना पुलिस ने इसी जगह पर छापा मारकर भारी मात्रा में तैयार किया जा रहा नकली तारकोल (बिटुमेन) पकड़ा था। उस समय भी चार लोग पकड़े गए थे, लेकिन मुख्य आरोपी बिजेंद्र भागने में सफल रहा था।

बार-बार एक ही जगह से मिल रही शिकायतों के बाद ही मामले की कमान सीआईए-1 को सौंपी गई थी। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी बिजेंद्र के ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और उसे जल्द ही सलाखों के पीछे लाया जाएगा।

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