Gurugram News: गुरुग्राम पुलिस की बड़ी कामयाबी, दिल्ली के पॉश इलाके से चल रहा था ठगी का अड्डा, गिरफ्तार
Jun 18, 2026 4:33 PM
गुरुग्राम। साइबर अपराधियों के बदलते पैंतरे और हाईटेक होती ठगी के बीच गुरुग्राम पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने दिल्ली के एक आलीशान फ्लैट से देशव्यापी नेटवर्क चला रहे तीन शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी दिलशाद गार्डन इलाके में किराए का ठिकाना बनाकर पूरे देश के भोले-भाले निवेशकों को अपनी जालसाजी का शिकार बना रहे थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी जनक (27) और हरियाणा के रहने वाले दिनेश कुमार (30, रेवाड़ी) व पवन कुमार (26, फतेहाबाद) के रूप में हुई है। तीनों ही आरोपी महज 12वीं पास हैं, लेकिन तकनीक के इस्तेमाल में किसी प्रोफेशनल से कम नहीं हैं।
दुबई रिटर्न पवन ने बुना अंतरराष्ट्रीय ताना-बाना, ऐसे खुली पोल
मामले की परतें तब खुलीं जब गुरुग्राम के एक शख्स ने अपने साथ हुई 2.53 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। तफ्तीश के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम में से 15 लाख रुपये एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे, जिससे चार मोबाइल नंबर जुड़े हुए थे। जब साइबर सेल ने आधुनिक डिजिटल संसाधनों की मदद से इन नंबरों की लोकेशन ट्रेस की, तो एक नंबर दिल्ली में एक्टिव मिला। इसके बाद टीम ने छापेमारी कर तीनों को दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि फतेहाबाद का पवन कुमार पहले दुबई में रह चुका है और पुलिस को शक है कि उसने वहीं से इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट की बारीकियां सीखी थीं।
टेलीग्राम पर मिलते थे आकाओं के निर्देश, मोटी सैलरी और बोनस का खेल
पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों ने कुबूल किया कि वे इस पूरे नेक्सस में सिर्फ 'मोहरे' की तरह काम कर रहे थे। मुख्य मास्टरमाइंड या हैंडलर उनसे टेलीग्राम ऐप के जरिए संपर्क में रहते थे। इन तीनों का काम विभिन्न फर्जी बैंक खातों (शैल अकाउंट्स) में आने वाले ठगी के पैसों को तुरंत दूसरे खातों में लेयरिंग के जरिए ट्रांसफर करना था। इस काम के एवज में इन्हें 25 हजार रुपये महीना सैलरी और हर कामयाब ट्रांजैक्शन पर मोटा बोनस मिलता था। ये पिछले 6 महीनों से लगातार इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहे थे।
वर्चुअल मुनाफे का ऐसा झांसा, जिसे देख लालच में आ जाते थे लोग
इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद चालाकी भरी थी। ये सोशल मीडिया के जरिए लोगों को पार्ट-टाइम जॉब और सुरक्षित निवेश का लालच देते थे। जैसे ही कोई इनके झांसे में आकर इनके बनाए ऑनलाइन पोर्टल पर साइन-अप करता, तो गेम शुरू होता था। पोर्टल का डैशबोर्ड इस तरह कस्टमाइज किया गया था कि निवेशक को अपनी रकम और उस पर मिलने वाला ब्याज ग्राफ की तरह बढ़ता हुआ दिखाई देता था। इस 'वर्चुअल प्रॉफिट' को असली समझकर पीड़ित और बड़ी रकम दांव पर लगा देते थे। लेकिन जैसे ही कोई अपना मूलधन या मुनाफा निकालने (विड्रॉ) की कोशिश करता, आरोपी उसे पोर्टल से ब्लॉक कर देते और सारा पैसा समेटकर रफूचक्कर हो जाते थे।
25 पासपोर्ट और 53 एटीएम बरामद, देश भर में फैली हैं कड़ियां
क्राइम ब्रांच ने जब इनके ठिकाने पर रेड की तो वहां का नजारा किसी कॉल सेंटर जैसा था। पुलिस ने मौके से 25 पासपोर्ट, 53 एटीएम कार्ड, 5 चेकबुक, 36 मोबाइल फोन और निगरानी के लिए लगाए गए 2 आईपी कैमरे जब्त किए हैं। शुरुआती जांच में ही देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 15 साइबर शिकायतों के तार इस गिरोह से जुड़े पाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतने सारे पासपोर्ट मिलने से यह अंदेशा और गहरा गया है कि गिरोह के तार मानव तस्करी या विदेशों में बैठे बड़े सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस इन बैंक खातों को फ्रीज करवाकर इनके मुख्य हैंडलर्स तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।