जगाधरी एनसीसी कैंप: कैडेट्स ने सीखे युद्ध क्षेत्र के गुर, 'नशा मुक्त हरियाणा' के लिए तैयार करेंगे सुरक्षा चक्र
Jun 18, 2026 4:06 PM
यमुनानगर (संजीव चौहान) यमुनानगर के जगाधरी स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में इन दिनों भविष्य के सैनिकों को गढ़ने का काम पूरी शिद्दत से चल रहा है। 14 हरियाणा बटालियन एनसीसी द्वारा आयोजित अंबाला ग्रुप थल सैनिक कैंप-सह-संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर अब अपने पूरे शबाब पर है। शिविर के सातवें दिन बुधवार को कैडेटों के सैन्य ज्ञान, मानसिक सतर्कता और सामाजिक दायित्वों को निखारने के लिए कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। अंबाला ग्रुप एनसीसी के ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर रोहित सहगल के मार्गदर्शन और 14 हरियाणा बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल पंकज पारीक की अगुवाई में चल रहा यह कैंप युवाओं को कड़े अनुशासन के बीच देश सेवा के लिए तैयार कर रहा है।
नशा समाज और परिवार का दुश्मन, कैडेट्स बनें जागरूकता के ब्रांड एंबेसडर
दिन की शुरुआत सैन्य ट्रेनिंग से इतर एक बेहद संवेदनशील और जरूरी विषय "नशा मुक्त हरियाणा" पर आयोजित व्याख्यान से हुई। मुख्य वक्ता डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने कैडेटों से सीधा संवाद करते हुए नशे के दलदल और इसके खतरनाक सामाजिक व शारीरिक दुष्परिणामों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म कर सकती है। डॉ. वर्मा ने सभी एनसीसी कैडेटों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने इलाकों में जाकर नशा मुक्ति अभियान की कमान संभालें और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें। इस सत्र ने कैडेटों के भीतर समाज को बदलने की एक नई ऊर्जा का संचार किया।
फील्ड क्राफ्ट और बैटल क्राफ्ट: जब मैदान में कैडेटों ने सीखे दुश्मन को चकमा देने के गुर
प्रशासनिक तौर पर लेफ्टिनेंट कर्नल कुमुद मैनी की देखरेख में चल रहे इस शिविर के तकनीकी सत्र में हवलदार अरविंद ने कमान संभाली। उन्होंने कैडेटों को 'फील्ड क्राफ्ट' और 'बैटल क्राफ्ट' के तहत युद्ध भूमि में अपनाई जाने वाली विभिन्न रक्षात्मक व आक्रामक तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास कराया। इस दौरान कैडेटों को सिखाया गया कि कैसे युद्ध क्षेत्र में विपरीत परिस्थितियों के बीच खुद को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना है (कैमोफ्लाज एंड कंसीलमेंट)। इस व्यावहारिक ट्रेनिंग के जरिए युवाओं को सेना के बुनियादी सिद्धांत— अनुशासन, अद्वितीय सतर्कता और मजबूत टीम वर्क के महत्व को गहराई से समझने का मौका मिला।
सूबेदार गुरमीत सिंह ने सिखाया नक्शा पढ़ना, नेविगेशन की उलझनें हुईं दूर
इसके बाद के सत्र में सूबेदार गुरमीत सिंह ने 'मैप रीडिंग' (मानचित्र अध्ययन) विषय पर एक विस्तृत और बेहद रोचक क्लास ली। उन्होंने ब्लैकबोर्ड और मैदान, दोनों जगहों पर कैडेटों को स्थलाकृतिक मानचित्रों (टोपोग्राफिकल मैप्स), पारंपरिक चिह्नों और ग्रिड संदर्भों (ग्रिड रेफरेंस) को डिकोड करना सिखाया। सेना में मैप रीडिंग को आंख और कान माना जाता है, और इस ट्रेनिंग के बाद कैडेटों का नेविगेशन स्किल काफी मजबूत हुआ। कर्नल पंकज पारीक ने बताया कि यह शिविर केवल शारीरिक श्रम का नाम नहीं है, बल्कि यह इन युवाओं में नेतृत्व क्षमता, चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास और सैन्य अभिविन्यास (मिलिट्री ओरिएंटेशन) को बढ़ावा देने का एक बेहतरीन और मुकम्मल मंच साबित हो रहा है।