MP में भाजपा ने तीनों राज्यसभा सीटें निर्विरोध जीतीं, मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई
Jun 11, 2026 4:04 PM
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है। गुरुवार दोपहर विधानसभा परिसर में रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिए। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने और उस पर समय रहते कोई राहत नहीं मिलने के बाद भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। अब इस पूरे मामले की कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गई है, जहां शुक्रवार को सुनवाई होनी है। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव को लेकर उठे इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कांग्रेस लगातार चुनाव प्रक्रिया और नामांकन रद्द करने के फैसले पर सवाल उठा रही है।
नामांकन रद्द होने के बाद बदला चुनावी समीकरण
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि उनका नामांकन रद्द हो जाने के बाद मुकाबला एकतरफा हो गया। नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के विपरीत फैसला लिया है। पार्टी का कहना है कि यदि नामांकन स्वीकार किया जाता तो चुनावी मुकाबला संभव होता, लेकिन इस फैसले ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया।
कांग्रेस ने नामांकन रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत से कहा कि नामांकन वापसी की अंतिम समय सीमा दोपहर 3 बजे तक है, इसलिए मामले पर जल्द फैसला जरूरी है। हालांकि सुप्रीम Court ने याचिका को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया और तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
चुनाव आयोग के रुख पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि उन्हें याचिका की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी और जवाब देने के लिए समय चाहिए। कांग्रेस ने इस रुख पर भी आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग को मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि आयोग ने समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया, जिससे विवाद और गहरा गया।
अपनी याचिका में कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैरकानूनी, मनमाना और पक्षपातपूर्ण बताया है। पार्टी का आरोप है कि नामांकन रद्द करने का निर्णय स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं था। कांग्रेस ने अदालत से मांग की है कि नामांकन निरस्त करने के आदेश को रद्द किया जाए और मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। पार्टी का दावा है कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है।
उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग चाहे तो पहले ही इस मामले में निर्णय ले सकता था। घार ने कहा कि अन्य राज्यों में चुनाव आयोग हस्तक्षेप कर चुका है, इसलिए मध्य प्रदेश के मामले में अलग रवैया समझ से परे है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसमें हो रही देरी चिंता का विषय है।
भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र मिल चुका है, लेकिन कांग्रेस अब भी कानूनी लड़ाई जारी रखे हुए है। शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। दि सुप्रीम कोर्ट मामले में कोई महत्वपूर्ण निर्देश देता है तो इसका प्रभाव चुनावी प्रक्रिया और भविष्य के ऐसे मामलों पर पड़ सकता है। फिलहाल मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा की निर्विरोध जीत दर्ज हो चुकी है।