Gurugram ACB Action: केस से नाम हटाने के बदले मांग रही थी रिश्वत, एंटी करप्शन ब्यूरो ने महिला पुलिसकर्मी को दबोचा
Jun 12, 2026 4:07 PM
गुरुग्राम। कानून की रखवाली और इंसाफ का भरोसा देने वाली खाकी एक बार फिर रिश्वतखोरी के दलदल में सनी नजर आई है। गुरुग्राम के मानेसर महिला थाने से भ्रष्टाचार का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां तैनात महिला हेड कांस्टेबल कविता को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने ₹50,000 की घूस लेते हुए रंगे हाथ काबू किया है। जांच के नाम पर आम लोगों को डराने और केस से नाम हटाने के एवज में सौदा करने वाली इस महिला पुलिसकर्मी की पूरी चालाकी एसीबी की रणनीतिक घेराबंदी के आगे धरी की धरी रह गई।
भाइयों को बचाने के लिए मांगी थी रकम, पीड़ित ने सीधे भ्रष्टाचार ब्यूरो को दी दस्तक
इस पूरे मामले का पटाक्षेप तब हुआ जब एक पीड़ित शख्स ने हिम्मत दिखाते हुए सीधे एंटी करप्शन ब्यूरो का रुख किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसकी पत्नी ने महिला थाना मानेसर में उसके और उसके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया हुआ था। इस संवेदनशील मामले की तफ्तीश का जिम्मा हेड कांस्टेबल कविता के पास था।
आरोप है कि कविता ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय इस मजबूरी का फायदा उठाना चाहा। उसने शिकायतकर्ता को डराया और मामले में सह-आरोप बनाए गए उसके दो भाइयों, बलराम और मुकेश का नाम एफआईआर (FIR) से बाहर निकालने की एवज में ₹50,000 की सीधी मांग कर दी। पीड़ित पक्ष रिश्वत देने के मूड में बिल्कुल नहीं था, इसलिए उन्होंने इस बात की लिखित सूचना तुरंत भ्रष्टाचार निरोधक दस्ते को दे दी।
नोटों पर केमिकल लगाकर बिछाया गया जाल, दबोचे जाते ही उड़े होश
शिकायत मिलते ही एसीबी के उच्चाधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया। योजना के मुताबिक, पीड़ित को केमिकल लगे नोट देकर हेड कांस्टेबल कविता के पास भेजा गया। जैसे ही कविता ने रिश्वत की वो रकम अपने हाथों में ली, घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। जब उसके हाथ धुलवाए गए, तो केमिकल के कारण वे लाल हो गए, जो उसकी बेईमानी का सबसे पुख्ता वैज्ञानिक सबूत बन गया।
एसीबी के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी हेड कांस्टेबल कविता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) की धारा 7 और नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस महकमे के ही किसी कर्मचारी का इस तरह भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाना विभाग की साख पर बड़े सवाल खड़े करता है। फिलहाल मामले की गहनता से जांच जारी है।