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Surya Chandra Grahan 2026: सावन में कब लगेंगे साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण, जानिए ग्रहण काल के धार्मिक नियम

Jun 12, 2026 3:36 PM

Surya Chandra Grahan 2026: साल 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण के अंतिम चरण सावन माह में पड़ेंगे। 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण का संयोग बनेगा। धर्मग्रंथों में ग्रहण काल को विशेष समय माना गया है, इसलिए इस दौरान कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

मुख्य बिंदु

  • साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को अमावस्या तिथि पर लगेगा।
  • साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा पर होगा।
  • ग्रहण काल में भोजन, सिलाई-कढ़ाई और अन्य कुछ कार्यों से बचने की मान्यता है।
  • 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण के साथ रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा।

2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण कब लगेंगे?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में सूर्य और चंद्र ग्रहण को विशेष खगोलीय घटनाओं के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन अमावस्या पर लगा था। अब साल का अंतिम सूर्य ग्रहण सावन माह की अमावस्या तिथि पर 12 अगस्त को लगेगा।

वहीं वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला है। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। ग्रहण और पर्व का यह संयोग श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्रहण काल को धार्मिक दृष्टि से क्यों माना जाता है खास?

धर्मग्रंथों में ग्रहण काल को सामान्य समय से अलग माना गया है। इसी वजह से ग्रहण के दौरान लोगों को संयम और विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।

मान्यता है कि ग्रहण के समय व्यक्ति को सांसारिक गतिविधियों की बजाय ईश्वर स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यही कारण है कि ग्रहण से जुड़े नियम आज भी बड़ी संख्या में लोग मानते हैं।

ग्रहण के दौरान भोजन क्यों नहीं करने की सलाह दी जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन करना उचित नहीं माना जाता। कई लोग ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन तैयार कर लेते हैं और खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते रख देते हैं।

मान्यता यह भी है कि ग्रहण काल में भोजन से परहेज करने से व्यक्ति मानसिक रूप से अधिक एकाग्र रह पाता है और धार्मिक साधना में मन लगा सकता है।

ग्रहण काल में किन कार्यों से बचने की परंपरा है?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान झाड़ू-पोछा लगाने, सिलाई-कढ़ाई करने या बुनाई जैसे कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। नुकीली वस्तुओं का उपयोग, बाल काटना और नाखून काटना भी शुभ नहीं माना जाता।

इसी प्रकार ग्रहण के दौरान सोने से भी परहेज करने की मान्यता है। कई श्रद्धालु इस समय मंत्र जाप, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और ध्यान करना पसंद करते हैं।

क्या ग्रहण के समय पूजा-पाठ किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस अवधि में नियमित पूजा-अर्चना नहीं की जाती और मूर्तियों को स्पर्श करने से भी बचा जाता है।

कई परंपराओं में ग्रहण काल के दौरान तुलसी तोड़ना भी वर्जित माना गया है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और शुद्धिकरण के साथ धार्मिक कार्य दोबारा शुरू किए जाते हैं।

गर्भवती महिलाओं को लेकर क्या मान्यताएं हैं?

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इसी कारण कई परिवार उन्हें ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहने की सलाह देते हैं।

हालांकि यह धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित प्रथाएं हैं, जिनका पालन लोग अपनी आस्था और परिवार की परंपराओं के अनुसार करते हैं।

ग्रहण के समय क्या करना शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण काल के दौरान भगवान का स्मरण, मंत्र जाप, ध्यान और धार्मिक चिंतन को शुभ माना गया है। कई श्रद्धालु इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र या अपने आराध्य देव के मंत्रों का जाप करते हैं।

आस्था रखने वाले लोगों का मानना है कि ग्रहण काल आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है।

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