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पंजाब मंत्री संजीव अरोड़ा पहुंचे हाईकोर्ट: ED गिरफ्तारी और रिमांड को को दी चुनौती, दोपहर तक सुनवाई होगी

May 12, 2026 12:55 PM

चंडीगढ़: पंजाब सरकार के मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजीव अरोड़ा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। शनिवार को ईडी ने चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया था। गिरफ्तारी के बाद देर रात उन्हें गुरुग्राम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 16 मई तक सात दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया। अब इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर आज दोपहर तक सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है। मामला कथित फर्जी GST बिल, इनपुट टैक्स क्रेडिट और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

चंडीगढ़ आवास से हुई गिरफ्तारी

ईडी की टीम शनिवार को संजीव अरोड़ा के चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर पहुंची थी। वहां कई घंटों तक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की गई। इसके बाद एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इसे केंद्र सरकार की कार्रवाई करार दिया। देर रात अरोड़ा को गुरुग्राम की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। ईडी ने अदालत में कहा कि मामले में वित्तीय लेनदेन और कई संदिग्ध कंपनियों की जांच की जानी बाकी है। अदालत ने एजेंसी की दलीलें सुनने के बाद सात दिन की रिमांड मंजूर कर ली।

100 करोड़ से ज्यादा के कथित फर्जी GST बिल का मामला

ईडी के अनुसार यह मामला 100 करोड़ रुपए से अधिक के कथित फर्जी GST बिल और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी का आरोप है कि संजीव अरोड़ा की कंपनी ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ ने दिल्ली की कुछ कथित फर्जी फर्मों से मोबाइल फोन खरीद दिखाए। एजेंसी का दावा है कि जिन कंपनियों से खरीद दिखाई गई, उनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था। इन कथित फर्जी इनवॉइस के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट और GST रिफंड हासिल किया गया। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।

राउंड ट्रिपिंग के आरोपों की जांच

जांच एजेंसी ने मामले में ‘राउंड ट्रिपिंग’ की आशंका भी जताई है। ईडी का कहना है कि मोबाइल फोन के निर्यात का कथित तौर पर इस्तेमाल अवैध धन को विदेश से वापस भारत लाने के लिए किया गया। जांच में दुबई समेत कुछ विदेशी लिंक भी सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक 5 मई 2026 को दर्ज नई FIR में कई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और कथित फर्जी सप्लायरों से जुड़े दस्तावेज सामने आए। ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

संजीव अरोड़ा पंजाब सरकार में अहम विभाग संभाल रहे थे और उन्हें सरकार के प्रभावशाली मंत्रियों में गिना जाता था। उनकी गिरफ्तारी के बाद सरकार ने उनके विभागों की जिम्मेदारी तीन अलग-अलग मंत्रियों को सौंप दी है। सरकार की ओर से अभी तक इस फैसले को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर विभागों के कामकाज को प्रभावित न होने देने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

AAP और विपक्ष आमने-सामने

संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। वहीं कांग्रेस और भाजपा समेत विपक्षी दलों ने मामले को गंभीर आर्थिक अनियमितता से जुड़ा बताया है। विपक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और यदि सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

अब सभी की नजर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है। अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को कानूनी रूप से चुनौती देते हुए राहत की मांग की है। अदालत में ईडी की कार्रवाई की वैधता और जांच प्रक्रिया पर बहस हो सकती है। यदि हाईकोर्ट इस मामले में कोई अंतरिम राहत देता है तो इससे जांच की दिशा प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर ईडी का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और कई अहम वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जानी बाकी है।

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