Punjab News: नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए पंजाब ने यूपीएसी को 14 आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा
Apr 07, 2026 11:12 AM
चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य में नियमित पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 14 वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेज दिया है। यह कदम स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए आवश्यक औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव कार्यवाहक डीजीपी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और नियमित नियुक्ति होने तक वही जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।
चयन प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी
यूपीएससी अब इस पैनल में शामिल 14 अधिकारियों के नामों की समीक्षा करेगा और उनमें से तीन उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करेगा। इसके बाद यह तीन नामों की सूची पंजाब सरकार को वापस भेजी जाएगी। राज्य सरकार इन तीन अधिकारियों में से एक को अंतिम रूप से पुलिस महानिदेशक नियुक्त करेगी। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपनाई जाती है, ताकि नियुक्ति पारदर्शी और योग्यता आधारित हो।
किन अधिकारियों के नाम शामिल
सूत्रों के अनुसार यूपीएससी को भेजे गए पैनल में डीजीपी रैंक के कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इनमें गौरव यादव के अलावा विशेष पुलिस महानिदेशक शरद सत्य चौहान, जो वर्तमान में पंजाब सतर्कता प्रमुख हैं, का नाम भी शामिल है। इसके साथ ही मादक पदार्थ रोधी कार्यबल के प्रमुख कुलदीप सिंह और वरिष्ठ अधिकारी हरप्रीत सिंह सिद्धू, जो फिलहाल पदस्थापना की प्रतीक्षा में हैं, को भी सूची में रखा गया है।
सरकार का पहले से तय रोडमैप
पिछले महीने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया था कि उनकी सरकार नियमित डीजीपी की नियुक्ति के लिए जल्द ही अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को भेजेगी। यह बयान ऐसे समय में आया था जब राज्य में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिरता को लेकर स्थायी नेतृत्व की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब पैनल भेजे जाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है।
स्थायी डीजीपी क्यों जरूरी
राज्य में पुलिस बल के प्रभावी संचालन के लिए स्थायी डीजीपी की नियुक्ति अहम मानी जाती है। इससे नीतिगत फैसलों में निरंतरता बनी रहती है और कानून व्यवस्था को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिलती है। कार्यवाहक व्यवस्था में अक्सर दीर्घकालिक योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधाएं आती हैं, इसलिए स्थायी नियुक्ति को प्रशासनिक मजबूती के लिए जरूरी माना जाता है।