तारंगा हिल-अंबाजी-आबूरोड रेल प्रोजेक्ट: 3050 करोड़ से बदलेगी राजस्थान-गुजरात की तस्वीर, काम तेज
Mar 22, 2026 5:12 PM
राजस्थान। गुजरात और राजस्थान की सीमाओं पर बसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के बीच अब ट्रेन की सीटी जल्द सुनाई देगी। तारंगा हिल से अंबाजी होते हुए आबूरोड तक जाने वाली नई रेल परियोजना अब अपने निर्माण के निर्णायक दौर में पहुंच गई है। रेलवे की इंजीनियरिंग शाखा दिन-रात अर्थवर्क, स्टेशनों की बिल्डिंग और अंडरब्रिज बनाने में जुटी है। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी भौगोलिक चुनौतियां हैं, जिन्हें पार करने के लिए अत्याधुनिक 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' (NATM) तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
अंबाजी में बनेगा 6 मंजिला स्टेशन, श्रद्धालुओं को मिलेगी वर्ल्ड क्लास सुविधा
शक्तिपीठ अंबाजी में बन रहा रेलवे स्टेशन इस पूरे रूट का सबसे बड़ा और आधुनिक केंद्र होगा। यहां आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 6 मंजिला विशाल यात्री विश्रामालय का निर्माण किया जा रहा है। इसी स्टेशन के पास 2300 मीटर लंबी सबसे बड़ी सुरंग बनाई जा रही है। रेलवे का लक्ष्य है कि मार्च 2027 तक चार मुख्य सुरंगों का काम हर हाल में पूरा कर लिया जाए। इसके साथ ही, आबूरोड स्टेशन पर एक नया प्लेटफार्म भी तैयार किया जा रहा है, जहां से इस नई लाइन की ट्रेनों का संचालन होगा।
पर्यटन और आस्था का संगम: जैन और बौद्ध तीर्थस्थलों की बढ़ेगी रौनक
यह रेल लाइन केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि दो राज्यों की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाला सेतु है। गुजरात के मेहसाणा में स्थित तारंगा हिल जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए बेहद पवित्र स्थान है। यहां 12वीं शताब्दी के प्राचीन जैन मंदिर और बौद्ध भिक्षुओं की 'जोगीड़ानी गुफाएं' स्थित हैं। अब तक इन इलाकों तक पहुंचना थोड़ा कठिन था, लेकिन रेल संपर्क जुड़ने से यहां धार्मिक पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
80 मीटर ऊंचा पुल और लैब का जाल: सुरक्षा और गुणवत्ता सर्वोपरि
रेलवे ने निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए सियावा के मालियावास क्षेत्र में एक 'बेस कैंप' और अस्थाई प्रयोगशाला (Lab) स्थापित की है, जहां हर सामग्री का कड़ा परीक्षण हो रहा है। आबूरोड ब्लॉक के सुरपगला गांव के पास बनने वाला 80 मीटर ऊंचा पुल इस रूट का एक प्रमुख आकर्षण होगा। अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब सारा ध्यान अर्थवर्क व टनलिंग पर केंद्रित है। चार जिलों को कवर करने वाली यह परियोजना आने वाले समय में उत्तर-पश्चिम भारत के विकास की नई लाइफलाइन साबित होगी।