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Rewari Ringus Special Train: रेवाड़ी-रींगस स्पेशल ट्रेन के फेरे बढ़े, देखें जून का नया शेड्यूल

Jun 04, 2026 1:09 PM

रेवाड़ी। जून के महीने में पड़ने वाली भीषण गर्मी और स्कूलों की छुट्टियों के चलते इस वक्त ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है। खासकर राजस्थान और हरियाणा के रूटों पर यात्रियों का दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। यात्रियों की इसी परेशानी को भांपते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे ने रेवाड़ी-रींगस स्पेशल रेलसेवाओं की संचालन अवधि को और आगे विस्तार देने का निर्णय लिया है। रेलवे प्रशासन द्वारा अतिरिक्त ट्रिप की घोषणा किए जाने से उन मुसाफिरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो इस रूट पर कंफर्म टिकट के लिए परेशान हो रहे थे।

जानिए जून महीने का नया शेड्यूल और तारीखें

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि गाड़ी संख्या 09633/09634 रेवाड़ी-रींगस-रेवाड़ी स्पेशल ट्रेन अब अपनी पूर्व निर्धारित अवधि के बाद भी पटरी पर दौड़ेगी। नई व्यवस्था के तहत यह ट्रेन रेवाड़ी से 10 जून, 24 जून और 25 जून को अपनी यात्रा शुरू करेगी। वहीं, वापसी में रींगस से यह स्पेशल ट्रेन 11 जून, 25 जून और 26 जून को यात्रियों को लेकर रवाना होगी। इस तरह इस ट्रेन के खाते में 3-3 अतिरिक्त फेरे जुड़ गए हैं।

इन तारीखों पर भी चलेगी दूसरी स्पेशल ट्रेन

इसी कड़ी में रेलवे ने एक और राहत देते हुए गाड़ी संख्या 09637/09638 रेवाड़ी-रींगस-रेवाड़ी स्पेशल के फेरे भी बढ़ा दिए हैं। शेड्यूल के मुताबिक, यह ट्रेन रेवाड़ी से 11 जून और 25 जून को पटरी पर उतरेगी, जबकि रींगस से भी इसका संचालन इन्हीं तारीखों यानी 11 जून और 25 जून 2026 को किया जाएगा। इस ट्रेन सेवा में 2-2 एक्स्ट्रा ट्रिप जोड़े गए हैं, जिससे वेटिंग लिस्ट के यात्रियों को कंफर्म सीट मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

न समय बदला, न स्टॉपेज; यात्रियों को नहीं होगी कोई उलझन

अक्सर देखा जाता है कि ट्रेनों के फेरे बढ़ने या रूट बदलने से यात्रियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है, लेकिन रेलवे ने साफ किया है कि इन स्पेशल ट्रेनों के समय और ठहराव में रत्ती भर भी बदलाव नहीं किया गया है। ट्रेनें जिन स्टेशनों पर पहले रुकती थीं, वहीं रुकेंगी और पुराना टाइम-टेबल ही लागू रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि ग्रीष्मावकाश में लोग भारी संख्या में परिवार सहित अपने घरों और धार्मिक व पर्यटन स्थलों का रुख करते हैं। ऐसे में नियमित ट्रेनों पर लोड कम करने के लिए यह व्यवस्था बेहद कारगर साबित होगी।

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