Rajasthan News: सीकर में 4000 बीघा जमीन बचाने के लिए किसानों का कलेक्ट्रेट घेराव, सीमेंट प्लांट और रेलवे लाइन पर जताई आपत्ति
May 18, 2026 3:51 PMसीकर: राजस्थान के सीकर जिले में प्रस्तावित तारपुरा एयरपोर्ट, रेलवे लाइन और सीमेंट प्लांट परियोजनाओं के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। सोमवार को दादिया और तारपुरा क्षेत्र के हजारों किसान सीकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और महापड़ाव शुरू कर दिया। किसानों का आरोप है कि प्रशासन करीब 4000 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित करने की तैयारी कर रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका और विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा।
तारपुरा, दादिया, बेरी और आसपास के गांवों से पहुंचे किसानों ने प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि लगातार विकास परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीनें ली जा रही हैं और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके पास खेती के लिए “एक इंच जमीन” भी नहीं बचेगी।
एयरपोर्ट और रेलवे परियोजना का विरोध
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित तारपुरा एयरपोर्ट और रेलवे लाइन परियोजना सीधे उनकी कृषि भूमि को प्रभावित करेगी। ग्रामीणों के अनुसार यह इलाका बेहद उपजाऊ है और यहां की अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है।
किसानों ने आरोप लगाया कि पहले रेलवे लाइन और अब एयरपोर्ट परियोजना के नाम पर बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की योजना बनाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह अधिग्रहण हुआ तो हजारों परिवारों को अपने पैतृक गांव छोड़ने पड़ेंगे।
महापंचायत में उठाई गईं चार प्रमुख मांगें
दादिया और तारपुरा गांव के किसानों ने महापंचायत के दौरान प्रशासन को चार प्रमुख मांगों का ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मांग की कि ग्राम सभा और किसानों की लिखित सहमति के बिना किसी भी प्रकार की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाए।
इसके अलावा किसानों ने एयरपोर्ट और रेलवे लाइन परियोजना को लेकर प्रशासन से सीधे संवाद की मांग की। ग्रामीणों ने जेरठी-दादिया अंडरपास की डिजाइन और स्थान को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराईं और कहा कि सीमेंट प्लांट तथा रेलवे लाइन के लिए खेतों के बजाय बंजर भूमि या वैकल्पिक मार्गों का सर्वे किया जाए।
पलायन और धार्मिक स्थलों पर असर की चिंता
ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि एयरपोर्ट बनने से क्षेत्र के किसानों को मजबूरी में पलायन करना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक अस्तित्व का भी प्रश्न है।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में कुल देवी-देवताओं के मंदिर, प्राचीन चबूतरे और धार्मिक स्थल मौजूद हैं। इनमें हरिराम मंदिर, जीणमाता मंदिर, मनसा माता मंदिर और बालाजी महाराज मंदिर प्रमुख हैं। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण होने पर ये धार्मिक स्थल भी प्रभावित होंगे।
गोचर भूमि और गौशाला पर भी संकट
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित परियोजनाओं की वजह से करीब 166 हेक्टेयर गोचर भूमि खत्म हो जाएगी। इसके साथ ही क्षेत्र की सार्वजनिक सुविधाएं भी प्रभावित होंगी। ग्रामीणों के अनुसार चिकित्सा, शिक्षा, जलदाय विभाग, विद्युत व्यवस्था, खेल मैदान, सामुदायिक भवन और सार्वजनिक श्मशान भूमि पर भी असर पड़ेगा। किसानों ने बताया कि करीब 10 हेक्टेयर क्षेत्र में बनी गौशाला भी उजड़ सकती है, जहां हजारों गौवंश रखे जाते हैं।
एयरपोर्ट प्रस्ताव वापस लेने की मांग
महापड़ाव में शामिल किसानों ने सरकार से प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। किसानों ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन और गांवों को खत्म करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से किसानों की मांगों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।