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NEET पेपर लीक पर भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी: पीएम मोदी और शिक्षा मंत्री पर निकाला गुस्सा, कही ये बड़ी बात

Jun 05, 2026 1:56 PM

छोटे पर्दे की मशहूर 'गोपी बहू' यानी एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी रील लाइफ में भले ही सीधी-सादी नजर आती हों, लेकिन रीयल लाइफ में वह सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं। देश के समसामयिक हालातों पर वह अक्सर मुखर रहती हैं। इस बार देवोलीना का गुस्सा नीट (NEET) पेपर लीक और उसके बाद उपजे देशव्यापी संकट पर फूटा है। नागपुर की एक होनहार छात्रा स्नेहा चतुर्वेदी द्वारा परीक्षा रद्द होने के सदमे में खुदकुशी किए जाने की घटना ने एक्ट्रेस को झकझोर कर रख दिया है। देवोलीना ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला है।

"सर, आप हमें निराश कर रहे हैं"— पीएम मोदी से बोलीं देवोलीना

छात्रा स्नेहा चतुर्वेदी के सुसाइड नोट के सामने आने के बाद देश भर के युवाओं और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। इसी गुस्से को अपनी आवाज देते हुए देवोलीना ने एक ट्वीट किया, जो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है। देवोलीना ने लिखा कि उन्होंने कई मोर्चों पर हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का खुलकर समर्थन किया है, लेकिन देश की शिक्षा व्यवस्था में जो कुछ भी चल रहा है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने पीएम को टैग करते हुए लिखा, "शिक्षा के साथ यह खिलवाड़, छात्रों के भविष्य की बर्बादी, लगातार होते पेपर लीक और फिर से परीक्षाएं कराना कोई जोक नहीं है सर। आप हमें निराश कर रहे हैं।"

"नेताओं के बच्चे विदेशों में, यहां छात्रों के जीवन से खिलवाड़"

अपने ट्वीट में देवोलीना ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी आड़े हाथों लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में पूछा कि शिक्षा मंत्री आखिर और कितनी मासूम जिंदगियां बर्बाद होने का इंतजार कर रहे हैं? एक्ट्रेस ने लिखा, "क्या आपको लगता है कि नीट और जेईई की दोबारा परीक्षा कराना कोई मजाक है? सच तो यह है कि खुद के बच्चे विदेशों में सुरक्षित पढ़ रहे हैं और यहां देश के मध्यमवर्गीय और गरीब बच्चों के भविष्य के साथ 'कबड्डी' खेली जा रही है।"

"मेहनत और मेरिट को समझने वाला होना चाहिए शिक्षा मंत्री"

यह कोई पहली बार नहीं है जब देवोलीना ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की हो। इससे पहले 12 मई को जब परीक्षा को लेकर पहली बार विवाद बढ़ा था, तब भी उन्होंने सिस्टम की खामियों पर तीखे सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि इस देश में युवाओं की पढ़ाई-लिखाई और उनका करियर महज एक तमाशा बनकर रह गया है। देवोलीना के मुताबिक, देश का शिक्षा मंत्री कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो खुद अकादमिक रूप से योग्य हो, जिसने खुद मेहनत से मुकाम हासिल किया हो और जो पढ़ाई व प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर होने वाले मानसिक दबाव और मेरिट की कीमत को बखूबी समझता हो।

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