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Corporate Job Viral : नौकरी को लेकर दिन-रात रोने वालों को शख्स ने दिखाया आईना, वीडियो देख सोच में पड़ी जनता

Jun 16, 2026 2:03 PM

आज के दौर में कॉर्पोरेट लाइफ, काम का दबाव, खराब बॉस और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर रोना रोना सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड बन चुका है। रील्स और मीम्स की इस भीड़ के बीच इंटरनेट पर एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने इस तथाकथित 'कॉर्पोरेट फ्रस्ट्रेशन' पर एक बिल्कुल अलग और कड़ा नजरिया पेश किया है। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में एक शख्स ने उन नौकरीपेशा लोगों की क्लास लगाई है जो दिन-रात अपने दफ्तर और काम को कोसते रहते हैं। युवक की बातें सुनने में भले ही कुछ लोगों को कड़वी और चुभने वाली लगें, लेकिन नेटिजन्स का एक बड़ा वर्ग इसे कॉर्पोरेट जगत का सबसे व्यावहारिक सच मान रहा है।

"शुक्रवार रात 9 बजे काम खत्म कर आया यह विचार"

वीडियो की शुरुआत में @iron_crafted_life अकाउंट चलाने वाले इस युवक ने बताया कि वह शुक्रवार की रात करीब 9 बजे अपने दफ्तर का कुछ पेंडिंग काम निपटा रहा था। काम पूरा करने के बाद जब वह फ्री हुआ, तो उसके जेहन में एक विचार कौंधा, जिसे उसने कैमरे के सामने रिकॉर्ड कर दुनिया से साझा करने का मन बनाया। शख्स ने कहा कि आज के समय में ऑफिस, काम के प्रेशर या कॉर्पोरेट कल्चर की हर समय लानत-मलामत करना लोगों की आदत में शुमार हो चुका है। लोग खुद को बहुत बड़ा विक्टिम (पीड़ित) दिखाने की कोशिश करते हैं।

खुद को बहुत टैलेंटेड समझते हो तो खुद का बिजनेस क्यों नहीं शुरू करते?

शख्स ने वीडियो में उन लोगों से एक सीधा और तीखा सवाल पूछा जो खुद को बेहद मेहनती, काबिल और अपने काम को लेकर जुनूनी बताते हैं। उसने कहा, "अगर आपके पास सचमुच इतना टैलेंट और पैशन है, तो आप आज भी उस डेस्क पर क्यों बैठे हैं जहां रहना आपको रत्ती भर पसंद नहीं है? अगर आपके भीतर इतनी ही क्षमता है, तो आप अपने सपनों को करियर में क्यों नहीं बदल लेते? अपना खुद का कोई स्टार्टअप या बिजनेस क्यों नहीं शुरू करते?" युवक का तर्क है कि बिना कोई रिस्क लिए और बिना कोई नया रास्ता चुने सिर्फ सोशल मीडिया पर बैठकर हर समय कंपनी की शिकायत करने से आपकी जिंदगी का सच नहीं बदलने वाला।

हर कोई असाधारण नहीं हो सकता, 'एवरेज' लाइफ में कोई बुराई नहीं

वीडियो का जो हिस्सा इस समय सबसे ज्यादा री-शेयर किया जा रहा है, वह है समाज में 'औसत' यानी एवरेज होने की स्वीकार्यता। शख्स ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह देश का हर बच्चा सचिन तेंदुलकर या विराट कोहली नहीं बन सकता, उसी तरह कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाला हर शख्स बिल गेट्स, मुकेश अंबानी या कोई मशहूर उद्यमी नहीं बन सकता। उसने बेहद बेबाकी से खुद को भी इसी साधारण श्रेणी में रखते हुए कहा, "ज्यादातर लोग एक नॉर्मल और साधारण जिंदगी जीते हैं और इसमें कोई खराबी नहीं है। दिक्कत यह है कि लोग यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि वे भी बाकी दुनिया की तरह बेहद साधारण हैं, और यही आत्ममुग्धता उन्हें अपनी परिस्थितियों से हमेशा नाराज रखती है।"

टॉक्सिक कल्चर का समर्थन नहीं, बल्कि नजरिया बदलने की है बात

हालांकि, अपनी इस बेबाक राय के साथ शख्स ने यह भी साफ किया कि वह किसी भी कंपनी में कर्मचारियों के शोषण या खराब कार्य संस्कृति (टॉक्सिक वर्क कल्चर) का समर्थन नहीं कर रहा है। उसका कहना था कि अगर कोई नौकरी वास्तव में आपके मानसिक सुकून या शारीरिक सेहत को बर्बाद कर रही है, तो उसे तुरंत लात मार देने में ही भलाई है। लेकिन, अगर दफ्तर का माहौल ठीक-ठाक है और सिर्फ रोजमर्रा के काम के दबाव के चलते आप चिढ़ रहे हैं, तो लगातार शिकायतें आपको और ज्यादा असंतुष्ट बना देंगी। खुशी आपके काम से ज्यादा आपके नजरिए पर टिकी है। अगर आप दिन के 9 घंटे जिस काम को देते हैं, उससे नफरत करते रहेंगे, तो जीवन में कभी खुश नहीं रह पाएंगे।

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