Indri News: इंद्री और गढ़ी बीरबल में बिजली कर्मियों का प्रदर्शन, 'एग्री डिस्कॉम' की कॉपियां जलाकर जताया रोष
Jun 16, 2026 6:36 PM
इंद्री। (गुंजन) हरियाणा के बिजली महकमे में प्रशासनिक स्तर पर किए जा रहे नीतिगत बदलावों और नए प्रयोगों को लेकर जमीनी स्तर पर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन की राज्य कमेटी के दिशा-निर्देश पर मंगलवार को सब-यूनिट इंद्री और गढ़ी बीरबल के बिजली कर्मचारियों ने दफ्तरों से बाहर निकलकर सरकार के खिलाफ तीखा रोष प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का मुख्य गुस्सा सरकार द्वारा थोपी जा रही 'हरियाणा एग्रो डिस्कॉम कंपनी', स्मार्ट मीटरों की अनिवार्यता और विभाग में बढ़ती ठेका प्रथा को लेकर है। इस नीतिगत बदलाव को पूरी तरह कर्मचारी व जनविरोधी बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने एग्रो डिस्कॉम के आधिकारिक नोटिफिकेशन के दस्तावेजों को सरेआम आग के हवाले कर दिया।
₹498 करोड़ से ₹29,000 करोड़ का घाटा; 'सुधार' के दावों पर उठाए सवाल
इंद्री में हुए प्रदर्शन की अध्यक्षता विनोद कांबोज ने की और मंच संचालन यूनिट सचिव संजीव मलिक ने संभाला, जबकि गढ़ी बीरबल में सब-यूनिट प्रधान जय कुमार की अगुवाई और सचिव बलिंद्र कांबोज के संचालन में कर्मचारी एकजुट हुए।
इस मौके पर विशेष रूप से पहुंचे राज्य कमेटी के वरिष्ठ सदस्य मलकीत सिंह ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए आंकड़ों के जरिए सरकार की घेराबंदी की। उन्होंने कहा, "साल 1998 में तत्कालीन सरकार ने बिजली क्षेत्र में सुधार और ₹498 करोड़ के घाटे को पाटने का तर्क देकर तत्कालीन हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड (HSEB) को भंग कर चार अलग-अलग निगम बना दिए थे। नतीजा क्या निकला? आज वह घाटा कम होने के बजाय बेलगाम होकर लगभग ₹29,000 करोड़ के आंकड़े को छू रहा है। अब एक बार फिर किसानों के नाम पर 'सुधार' का नया झुनझुना थमाया जा रहा है।"
"किसानों को मोहरा बना रही सरकार, खत्म होगी सब्सिडी"
यूनियन के नेताओं (राजीव राठी, जय कुमार और अन्य) ने सरकार के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा है कि एग्रो डिस्कॉम के जरिए किसानों को निर्बाध बिजली और जल्द कनेक्शन मिलेंगे। कर्मचारी नेताओं ने तकनीकी हकीकत बयां करते हुए कहा कि हरियाणा में साल 2010 के बाद से ही कृषि क्षेत्र (एग्रीकल्चर) के लिए अलग से फीडर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनके जरिए खेतों को पहले से ही सुचारू रूप से बिजली मिल रही है।
असल में, सरकार इस नई कंपनी के बहाने बिजली क्षेत्र के पूर्ण निजीकरण की जमीन तैयार कर रही है। इसके पीछे की मंशा धीरे-धीरे 'क्रॉस सब्सिडी' (जिसके तहत किसानों और गरीबों को सस्ती बिजली मिलती है) को पूरी तरह समाप्त करना है। अगर ऐसा हुआ, तो आने वाले समय में खेती और आम आदमी के लिए बिजली का बिल चुकाना दूभर हो जाएगा।
बड़े आंदोलन की दी चेतावनी; फील्ड स्टाफ रहा मुस्तैद
कर्मचारी नेताओं ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि समय रहते हरियाणा सरकार ने एग्रो डिस्कॉम के इस फैसले को रद्द नहीं किया, तो बिजली कर्मचारी दफ्तरों और ग्रिडों का चक्का जाम करने जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस व्यापक प्रदर्शन में फील्ड स्टाफ और तकनीकी अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। रोष जताने वालों में मुख्य रूप से जेई पवन तेजेंदर, पवन, नवीन शर्मा, सुमित, मनजीत, राकेश मेहता, पवन सैनी, अरुण, राजेश, मोहन, सुमेर, जीवन, सतेंद्र, जितेंद्र, रिंकू, विकास, राजकुमार, संजीव, अंकित, ललित, रोहित और प्रदीप सचिन सहित दोनों सब-यूनिट्स के दर्जनों कर्मचारी व पदाधिकारी शामिल रहे।