FBI Ghost Town: अमेरिका का वो अनोखा शहर जहां इंसान नहीं, रहते हैं सिर्फ खतरनाक हैकर्स; जानिए पूरा सच
Jun 16, 2026 1:09 PM
चमचमाती हुई सड़कें, चौराहों पर जलती-बुझती ट्रैफिक लाइटें, गाड़ियों के ईंधन के लिए बने पेट्रोल पंप, आलीशान होटल और मरीजों के इलाज के लिए तैयार खड़े अस्पताल। पहली नजर में यह अमेरिका का कोई भी आम खुशहाल शहर नजर आ सकता है, लेकिन इस पूरी चकाचौंध के बीच एक भी इंसान की परछाई दिखाई नहीं देती। हॉरर फिल्मों के किसी सेट जैसा दिखने वाला यह 'भूतिया' शहर असल में अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) का एक बेहद गुप्त और अरबों डॉलर का हाई-टेक मास्टरप्लान है। अलबामा के हंट्सविले में स्थित इस नकली शहर को बसाने के पीछे का मकसद कोई इंसानी आबादी बसाना नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के सबसे खतरनाक हैकर्स की काट ढूंढना है।
बंद कमरों की थ्योरी खत्म, लाइव साइबर अटैक झेलता है यह नकली शहर
एफबीआई ने इस अनूठी जगह को 'काइनेटिक साइबर रेंज' का नाम दिया है। 22,000 वर्ग फुट में फैली इस कृत्रिम दुनिया को हूबहू अमेरिका के किसी छोटे कस्बे की तर्ज पर ढाला गया है। खुफिया एजेंसी ने इसे अपने एजेंट्स के लिए एक ऐसे प्लेग्राउंड के रूप में विकसित किया है, जहां वे बंद कमरों में कंप्यूटर स्क्रीन पर कोडिंग सीखने के बजाय, सीधे जमीनी स्तर पर होने वाले साइबर हमलों का सामना करते हैं। आज के समय में जब पूरी दुनिया इंटरनेट पर निर्भर है, तब हैकर्स के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए इस तरह की लाइव ट्रेनिंग एजेंट्स के लिए बेहद जरूरी हो चुकी है।
2 लाख करोड़ की चपत से बचने की कवायद, अस्पतालों और पावर ग्रिड पर रहता है खतरा
आखिर अमेरिकी सरकार को इस नकली शहर पर पानी की तरह पैसा बहाने की जरूरत क्यों पड़ी, इसका जवाब एफबीआई की हालिया साइबर क्राइम रिपोर्ट में मिलता है। आंकड़ों के मुताबिक, अकेले अमेरिका में साइबर अपराधों के कारण होने वाला नुकसान करीब 20.9 अरब डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) के आंकड़े को पार कर चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस नुकसान में हर साल 26 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है। आज हैकर्स के निशाने पर आम लोग नहीं, बल्कि बड़े अस्पताल, सरकारी बैंकों के सर्वर और देश के पावर ग्रिड हैं। इसी राष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए एफबीआई ने इस डमी टाउन का निर्माण किया है।
जानबूझकर बनाया गया 'टॉर्चर रूम', शोर और कड़ाके की ठंड के बीच होती है परीक्षा
इस नकली शहर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां की ट्रैफिक लाइट से लेकर अस्पताल की वेंटिलेटर मशीनें और पेट्रोल पंप तक, सब कुछ सीधे इंटरनेट से जुड़े हैं। ट्रेनिंग के दौरान अचानक ट्रेनर्स अस्पताल की बिजली गुल कर देते हैं या पूरे शहर का ट्रैफिक सिस्टम हैक कर लेते हैं। इसके बाद ट्रेनी एजेंट्स पर कम से कम समय में पूरे सिस्टम को रिकवर करने का भारी दबाव होता है। इसके लिए शहर के भीतर 200 से अधिक फिजिकल सर्वरों वाला एक विशाल डेटा सेंटर बनाया गया है। एजेंट्स को मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए इस सर्वर रूम को जानबूझकर बेहद तंग, अत्यधिक ठंडा और कानों को बहरा कर देने वाले शोरगुल से भरा रखा गया है, ताकि वास्तविक संकट के समय वे बिना पैनिक हुए काम कर सकें।
अब तक 1,400 से ज्यादा 'साइबर सिपाही' तैयार, हैकर्स के लिए बने काल
टेक जगत की प्रतिष्ठित रिपोर्ट 'टेकक्रंच' के अनुसार, एफबीआई का यह सीक्रेट प्रोजेक्ट सुरक्षा के लिहाज से गेम चेंजर साबित हो रहा है। इस काइनेटिक साइबर रेंज से अब तक 1,400 से अधिक उच्च प्रशिक्षित साइबर वॉरियर्स (योद्धा) तैयार होकर निकल चुके हैं। यहां मिलने वाली कड़क प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के दम पर ये एजेंट्स हैकर्स के कड़े से कड़े सुरक्षा घेरे और लॉक्स को तोड़ने में माहिर हो रहे हैं। वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से इस नकली शहर में तैयार हो रहे ये जासूस आने वाले दिनों में साइबर टेररिज्म के खिलाफ सबसे बड़ी ढाल बनने जा रहे हैं।