स्कूल में गुंडागर्दी का 'इलाज': जगाधरी सिविल अस्पताल में 3 महीने सेवा करेगा दोषी छात्र।
Mar 17, 2026 1:52 PM
यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर जिले में 'कम्युनिटी सर्विस' के तहत सुनाया गया यह फैसला नजीर बन गया है। मामला अगस्त 2024 का है, जब जगाधरी के एक सरकारी स्कूल में गुंडागर्दी का नंगा नाच देखने को मिला था। उस वक्त हथियारों से लैस कुछ लड़कों ने स्कूल परिसर की गरिमा को तार-तार करते हुए एक छात्र पर जानलेवा हमला कर दिया था। अब उसी मामले में सुनवाई करते हुए किशोर न्याय परिषद की जज डॉ. करुणा शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराध चाहे नाबालिग ने किया हो, वह माफी के योग्य नहीं है, लेकिन उसे सुधारने का तरीका सुधारात्मक होना चाहिए।
20 अगस्त 2024 की वो तारीख जगाधरी के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्टाफ और छात्रों के लिए किसी डरावने सपने जैसी थी। स्कूल के प्रिंसिपल मोहम्मद जावेद अपने कार्यालय में बैठे थे, तभी अचानक शोर-शराबे और चीख-पुकार के बीच एक छात्र जान बचाने के लिए उनके केबिन में घुस आया। उसके पीछे हाथों में हथियार लिए चार-पांच लड़के भी ऑफिस में दाखिल हो गए। हमलावरों ने प्रिंसिपल की मौजूदगी का खौफ खाए बिना छात्र को लहूलुहान कर दिया और बाइक पर सवार होकर फरार हो गए। इस घटना ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी।
अदालत का कड़ा रुख: "माफी नहीं, जिम्मेदारी मिलेगी"
केस की सुनवाई के दौरान आरोपित नाबालिग की ओर से रहम की दुहाई दी गई, लेकिन अदालत ने उसे सिरे से खारिज कर दिया। जज ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि स्कूल जैसे पवित्र स्थान पर हथियारों के साथ घुसकर हिंसा करना गंभीर अपराध है। सजा के तौर पर तय किया गया कि नाबालिग को जगाधरी सिविल अस्पताल की ओपीडी और वार्डों में प्यासे मरीजों की सेवा करनी होगी। अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया गया है कि वह इस दौरान लड़के की कार्यशैली और अनुशासन पर पैनी नजर रखे।
सेवा की रिपोर्ट तय करेगी भविष्य
अदालत ने इस सजा को बेहद व्यवस्थित बनाया है। यदि नाबालिग बिना बताए ड्यूटी से गायब रहता है, तो इसकी सीधी रिपोर्ट जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर मरीजों का दर्द और उनकी लाचारी देखकर किसी भी विचलित किशोर की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। यह सजा न केवल उसे अपनी गलती का अहसास कराएगी, बल्कि समाज के प्रति उसके दायित्वों को भी परिभाषित करेगी।