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यमुनानगर में आंगनवाड़ी वर्कर्स का महासंग्राम: 7 महीने से नहीं मिला वेतन, जेब से भर रही हैं किराया

Apr 15, 2026 5:00 PM

यमुनानगर। प्रदेश की महिला एवं बाल विकास योजनाओं की रीढ़ कही जाने वाली आंगनवाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स आज खुद ही बदहाली के आंसू बहाने को मजबूर हैं। अपनी वाजिब मांगों और पिछले कई महीनों से बकाया मानदेय को लेकर जिले भर की सैकड़ों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बुधवार को जिला मुख्यालय पर हल्ला बोला। 'आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन (रजिस्टर्ड 1442)' के बैनर तले आयोजित इस एक दिवसीय सांकेतिक धरने में महिलाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर था।

घर चलाना हुआ दूभर: 7 महीने का मानदेय अब भी अधूरा

धरने की अध्यक्षता कर रहीं जिला प्रधान कमलेश देवी ने सरकार की वादाखिलाफी पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने बताया कि स्थिति यह है कि केंद्र सरकार के हिस्से का मानदेय पिछले सात महीनों से लंबित पड़ा है, वहीं राज्य सरकार ने भी मार्च महीने का भुगतान अब तक नहीं किया है।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दुख जताते हुए कहा, "अप्रैल का महीना है, बच्चों के स्कूलों में दाखिले हो रहे हैं, किताबें-कॉपियां खरीदनी हैं। ऐसे समय में जब जेब खाली हो, तो एक मां और एक कामकाजी महिला पर क्या गुजरती है, यह सरकार को दिखाई नहीं दे रहा। हम आर्थिक संकट के उस मोड़ पर हैं जहाँ घर का चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो रहा है।"

जेब से भर रही हैं किराया और गैस सिलेंडर का खर्च

धरने के दौरान जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह विभागीय लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। वर्कर्स ने आरोप लगाया कि आंगनवाड़ी केंद्रों का किराया पिछले डेढ़ साल से विभाग ने जारी नहीं किया है, जिसे वे अपनी सीमित आय या उधारी लेकर अपनी जेब से भर रही हैं। यही नहीं, दो साल से गैस सिलेंडर का खर्च भी नहीं मिला है।

छछरौली, रादौर, बिलासपुर और जगाधरी जैसे तमाम ब्लॉकों से आईं महिलाओं ने एक सुर में कहा कि वे सरकार की योजनाओं को घर-घर पहुँचाती हैं, लेकिन सरकार उनके बुनियादी हकों को ही डकार गई है।

"घोषणाएं बड़ी, हकीकत शून्य": सरकार को दो-टूक

जिला प्रधान कमलेश देवी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, "सरकार मंचों से बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हमें अपने ही पैसे के लिए सड़कों पर बैठना पड़ रहा है। अगर हम अपना हक मांग रहे हैं, तो इसमें गलत क्या है? हम कब तक अपनी जेब से सरकारी केंद्रों का खर्च उठाएंगे?"

डीसी के माध्यम से सौंपा मांग पत्र, बढ़ेगी रार

प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से अपनी मांगों का एक ज्ञापन उच्च अधिकारियों को भेजा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक सांकेतिक प्रदर्शन है। यदि जल्द ही बकाया मानदेय, केंद्रों का किराया और गैस सिलेंडर के खर्च का भुगतान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में जिले की सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स काम ठप कर उग्र आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगी। जिला मुख्यालय पर हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासनिक अधिकारियों के बीच भी हलचल तेज कर दी है।

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