यमुनानगर में बड़ी कार्रवाई: छछरौली के बरौली माजरा में कब्जामुक्त हुई 8 एकड़ पंचायती जमीन, 2011 से चल रहा था कोर्ट केस
Jun 12, 2026 1:32 PM
यमुनानगर। यमुनानगर के छछरौली खंड के अंतर्गत आने वाले गांव बरौली माजरा में वर्षों से चली आ रही एक बड़ी सियासी और कानूनी जंग का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। गांव की करीब आठ एकड़ पंचायती भूमि पर कुछ रसूखदार लोगों ने लंबे समय से अवैध कब्जा जमा रखा था। शुक्रवार को जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और छछरौली थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर इस जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त करा लिया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने मौके पर ही जमीन की पैमाइश की और चारों तरफ कंक्रीट के पोल गाड़कर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की।
साल 2011 से चल रहा था विवाद, मौजूदा पंचायत ने दिखाई कड़ाई
ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस जमीन को लेकर विवाद साल 2011 से चल रहा था। पिछली कई पंचायतें इस मामले में ढुलमुल रवैया अपनाती रहीं, जिसके कारण मामला अदालती फाइलों में ही दबा रहा। हालांकि, वर्तमान पंचायत और सरपंच प्रतिनिधि ने पद संभालते ही इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता में रखा। उन्होंने न केवल प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष मजबूत पैरवी की, बल्कि कानूनी कड़ियों को भी दुरुस्त किया। नतीजा यह हुआ कि अदालत का फैसला पंचायत के पक्ष में आया और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया। जमीन वापस मिलते ही ग्रामीणों और पंचायत सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई।
लाखों की लकड़ी और करोड़ों की जमीन से बदलेगी गांव की सूरत
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मुक्त कराई गई इस आठ एकड़ जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। खास बात यह है कि इस जमीन पर पहले से ही लाखों रुपये मूल्य की कीमती लकड़ी (पेड़) खड़ी है, जो अब सीधे तौर पर पंचायत की संपत्ति बन चुकी है। सरपंच प्रतिनिधि का कहना है कि इस जमीन को अब नियमों के मुताबिक पट्टे (नीलामी) पर दिया जाएगा। इससे हर साल पंचायत के खाते में एक मोटी रकम आएगी, जिसका इस्तेमाल गांव की गलियों, पक्की सड़कों, स्कूलों और पेयजल व्यवस्था को सुधारने में किया जाएगा। इस फैसले से ग्राम पंचायत की वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत हो जाएगी।