बाढ़ का खतरा होगा कम! यमुनानगर में नदियों के सुरक्षा चक्र पर खर्च हो रहे 40 करोड़ रुपये
May 08, 2026 1:40 PM
यमुनानगर। मानसून की दस्तक से पहले यमुनानगर प्रशासन और सिंचाई विभाग ने बाढ़ के संभावित खतरे से निपटने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पिछले साल सोम और यमुना नदी के उफान ने जिस तरह जिले के दर्जनों गांवों में तबाही मचाई थी, उसे देखते हुए इस बार विभाग कोई भी कोताही बरतने के मूड में नहीं है। करीब 40 करोड़ रुपये के बजट से जिले की प्रमुख नदियों—यमुना, सोम और पथराला के किनारों को पक्का और मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि 15 जून तक सभी सुरक्षात्मक कार्य पूरे कर लिए जाएंगे ताकि बरसात शुरू होते ही ग्रामीण चैन की नींद सो सकें।
तिहानो गांव पर विशेष नजर, सोम नदी का तांडव रोकने की कोशिश
इस बार सिंचाई विभाग का सबसे ज्यादा ध्यान सोम नदी के तट पर बसे तिहानो गांव पर है। पिछले मानसून में सोम नदी के टूटे तटबंध ने तिहानो गांव में ऐसा कहर बरपाया था कि गांव की करीब 80 प्रतिशत फसलें जलसमाधि ले चुकी थीं। हफ्तों तक खेतों और घरों में पानी खड़ा रहने की वजह से किसानों को भारी आर्थिक चोट पहुंची थी। इसी कड़वे अनुभव से सबक लेते हुए, विभाग अब तिहानो के पास नदी तट को पत्थरों (स्टड) के जरिए अभेद्य बना रहा है, ताकि पानी का तेज बहाव मिट्टी का कटाव न कर सके।
24 घंटे काम पर लगी मशीनें, डेडलाइन का दबाव
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ नियंत्रण से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम की रफ्तार बढ़ा दी गई है। नदी क्षेत्रों में दिन-रात मशीनें चल रही हैं और तटबंधों की ऊंचाई बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें चौड़ा भी किया जा रहा है। विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय है, क्योंकि पहाड़ों पर होने वाली प्री-मानसून बारिश कभी भी नदियों का जलस्तर बढ़ा सकती है। प्रशासन का मानना है कि यदि 15 जून तक पत्थर लगाने और तटबंधों की मरम्मत का काम पूरा हो जाता है, तो बाढ़ और भूमि कटाव के खतरे को 90 फीसदी तक कम किया जा सकेगा।
पिछली गलतियों से सीखा सबक: प्रशासन का अलर्ट मोड
बाढ़ के पिछले अनुभवों ने प्रशासन को इस बार ज्यादा सतर्क कर दिया है। केवल सोम नदी ही नहीं, बल्कि यमुना और पथराला नदी के संवेदनशील पॉइंट्स पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन और अन्य आला अधिकारी खुद फील्ड में उतरकर काम की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं। ग्रामीणों का भी कहना है कि यदि यह काम समय पर पूरा होता है, तो उन्हें अपनी मेहनत से उगाई फसल और आशियाने खोने का डर नहीं सताएगा। फिलहाल, मशीनी शोर और मजदूरों की सक्रियता यह बता रही है कि यमुनानगर इस बार आसमानी आफत से दो-दो हाथ करने के लिए पूरी तरह तैयार है।