थाली हुई खाली! हरियाणा के 805 स्कूलों में मिड डे मील सप्लाई ठप, शिक्षकों पर पड़ा आर्थिक बोझ
May 11, 2026 3:03 PM
यमुनानगर। यमुनानगर जिले के 592 प्राथमिक और 213 माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 62 हजार बच्चों के लिए दोपहर का भोजन अब किसी चुनौती से कम नहीं रहा। नियम के मुताबिक, एफसीआई (FCI) को गेहूं-चावल और हरियाणा एग्रो को दाल, तेल व मसाले उपलब्ध कराने होते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिछले एक महीने से अधिकांश स्कूलों में सप्लाई का ट्रक नहीं पहुंचा है। शिक्षकों का कहना है कि दो-तीन महीने पहले जो राशन आया था, वह अब खत्म हो चुका है। ऐसे में बच्चों का खाना बंद न हो, इसके लिए शिक्षक अपनी सैलरी से पैसे खर्च कर राशन जुटा रहे हैं।
गुणवत्ता और अनियमितता ने बढ़ाई परेशानी
प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सुरेंद्र कांबोज ने मौजूदा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले शिक्षक थोक बाजार से खुद राशन खरीदते थे, जिससे गुणवत्ता की गारंटी रहती थी। अब एजेंसियों के माध्यम से पैक राशन आता है, जिसकी क्वालिटी कई बार संदेह के घेरे में होती है। कांबोज ने कहा, "फिलहाल स्थिति गंभीर है, कई स्कूलों में राशन शून्य हो चुका है। विभाग को तुरंत हरकत में आना चाहिए ताकि शिक्षकों पर पड़ रहा यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो सके।"
क्या कहती है मिड डे मील यूनियन?
यूनियन की राज्य सचिव शरबती ने योजना की बदहाली पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षा और बेहतर पोषण के बड़े-बड़े विज्ञापन देती है, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में दाल और तेल तक के लाले पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण मिड डे मील वर्कर्स और शिक्षकों को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
अधिकारियों का आश्वासन: 'जल्द पहुंचेगा राशन'
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक राणा का कहना है कि राशन की डिमांड भेजी जा चुकी है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों से संपर्क साधा है और उम्मीद जताई है कि आगामी कुछ दिनों के भीतर सभी स्कूलों में सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब स्टॉक खत्म होने वाला था, तब विभाग ने पहले से इंतजाम क्यों नहीं किए?