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यमुनानगर न्यूज़: ताजेवाला में आग का तांडव, दो छान जलकर राख, ग्रामीणों ने बचाई बुजुर्ग की जान

Apr 12, 2026 2:04 PM

यमुनानगर।  यमुनानगर के ताजेवाला गांव में रविवार की दोपहर किसी काल से कम नहीं थी। गांव के बाहर बने पशुओं के बाड़े और भूसे के गोदाम (छान) में अचानक उठी चिंगारी ने ऐसा तांडव मचाया कि सब कुछ राख के ढेर में बदल गया। पीड़ित किसान राजुल ने बताया कि दोपहर के वक्त जब हवाएं अपनी पूरी रफ्तार पर थीं, तभी एक छान से धुआं उठते देखा गया। जब तक कोई कुछ समझ पाता या पानी का इंतजाम करता, तब तक आग की लपटें आसमान छूने लगीं। सूखी घास और लकड़ी के बने ढांचों ने आग के लिए घी का काम किया, जिससे पास में बना दूसरा छान भी देखते ही देखते स्वाहा हो गया।

जांबाज ग्रामीणों ने टाला बड़ा हादसा, बचाई बुजुर्ग की जान

हादसे के वक्त छान के भीतर एक बुजुर्ग व्यक्ति आराम कर रहे थे और पास ही पशु भी बंधे हुए थे। आग की लपटें और धुआं देखकर पूरे गांव में हड़कंप मच गया। लेकिन खौफ के उस मंजर में भी ग्रामीणों ने गजब का साहस दिखाया। दर्जनों युवा और ग्रामीण बाल्टियां लेकर दौड़ पड़े और सबसे पहले अंदर फंसे बुजुर्ग और बेजुबान पशुओं को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि ग्रामीणों ने चंद मिनटों की भी देरी की होती, तो आज ताजेवाला गांव किसी बड़ी मानवीय त्रासदी का गवाह बन सकता था।

लाखों का सामान जलकर कोयला, कारणों की जांच जारी

आग इतनी भीषण थी कि जब तक ग्रामीण और आसपास के लोग इस पर काबू पाते, तब तक छान में रखा हजारों रुपये का भूसा, खेती-बाड़ी में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और कीमती घरेलू सामान जलकर कोयला हो चुका था। आग लगने की असल वजह अभी तक रहस्य बनी हुई है, हालांकि प्रारंभिक कयासों में इसे शॉर्ट सर्किट या किसी उड़ती हुई चिंगारी का नतीजा माना जा रहा है। दिन का समय होने के कारण राहत कार्य जल्दी शुरू हो गया, जिससे आग रिहायशी इलाके तक नहीं फैल पाई।

प्रशासन से न्याय और राहत की उम्मीद

हादसे के बाद से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है। आर्थिक रूप से कमजोर राजुल के लिए यह क्षति किसी बड़े झटके से कम नहीं है। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया है। पीड़ित ने जिला प्रशासन और खंड अधिकारियों से मांग की है कि मौके का मुआयना कर नुकसान का उचित आकलन किया जाए और उन्हें जल्द से जल्द आर्थिक मुआवजा दिया जाए ताकि वे अपने पशुओं के लिए दोबारा सिर ढकने की जगह बना सकें।

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