Rewari News: स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में फिर शर्मसार हुई स्वास्थ्य व्यवस्था, एम्बुलेंस में हुई सतामासी बच्ची की डिलीवरी

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में फिर शर्मसार हुई स्वास्थ्य व्यवस्था, एम्बुलेंस में हुई सतामासी बच्ची की डिलीवरी
Rewari News: हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं के तमाम बड़े दावों के बीच रेवाड़ी जिले से सरकारी अस्पतालों की संवेदनहीनता की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कोसली से रेफर होकर रेवाड़ी नागरिक अस्पताल पहुंची एक 7 माह की गर्भवती महिला को डॉक्टरों ने बिना मुकम्मल इलाज के देर रात रोहतक रेफर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि रोहतक ले जाते समय रेवाड़ी-रोहतक हाईवे पर स्थित डीघल टोल प्लाजा के पास एम्बुलेंस में ही महिला की डिलीवरी करानी पड़ी। जच्चा और प्री-मैच्योर (सतामासी) बच्ची को गंभीर हालत में रोहतक पीजीआई (PGI) में भर्ती कराया गया है।
कानों में लीड लगाकर फोन पर व्यस्त थी डॉक्टर, सीधे थमा दिया रेफर कार्ड
झाझर सीमा से सटे गांव साल्हावास निवासी जोगेंद्र (निजी ट्रांसपोर्ट कर्मी) ने बताया कि 28 अगस्त की रात उसकी 29 वर्षीय गर्भवती पत्नी रिंकू को अचानक तेज पेट दर्द शुरू हुआ। परिजन तुरंत उसे कोसली के सरकारी अस्पताल ले गए, जहां से डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद रेवाड़ी नागरिक अस्पताल भेज दिया। रात करीब 11:30 बजे जब वे रेवाड़ी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में पहुंचे, तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था।
जोगेंद्र के मुताबिक, ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर कानों में लीड लगाए किसी से फोन पर बात करने में मस्त थी। मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद उसने उचित इलाज या राहत देने के बजाय आनन-फानन में रोहतक रेफरल पेपर तैयार कर थमा दिए।
डीघल टोल के पास चीखों से गूंजी एम्बुलेंस, मजबूरी में करानी पड़ी डिलीवरी
रेवाड़ी से एम्बुलेंस मरीज को लेकर रोहतक के लिए रवाना हुई। एम्बुलेंस में रिंकू के साथ उसकी बहन नीलम और एक लैब तकनीशियन (LT) मौजूद थे। जैसे ही एम्बुलेंस रेवाड़ी-रोहतक हाईवे पर डीघल टोल प्लाजा के पास पहुंची, रिंकू की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। स्थिति बिगड़ती देख चालक को हाईवे किनारे गाड़ी रोकनी पड़ी। एम्बुलेंस में मौजूद एलटी और मरीज की बहन ने किसी तरह कड़ी मशक्कत के बाद वाहन के भीतर ही प्रसव कराया, जहां रिंकू ने एक बच्ची को जन्म दिया।
पीड़ित पति जोगेंद्र ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि यदि वे किसी निजी अस्पताल का खर्च उठा सकते तो उनकी पत्नी को सड़क पर इस दर्दनाक स्थिति से न गुजरना पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में रात के समय तैनात स्टाफ अपनी नींद पूरी करने और जवाबदेही से बचने के लिए गरीब मरीजों को बिना सोचे-समझे रेफर कर उनकी जान जोखिम में डाल देता है।
20 दिनों में दूसरा मामला: पहले कोसली में सड़क पर हुआ था प्रसव
रेवाड़ी जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे महज 20 दिन पहले, 8 अगस्त को कोसली के भाकली इलाके में भी ऐसा ही वाकया हुआ था। मूल रूप से गुजरात के सुंदर नगर निवासी राकेश की पत्नी निशा (8 माह की गर्भवती) की तबीयत बिगड़ने पर कोसली अस्पताल से अल्ट्रासाउंड के लिए रेवाड़ी रेफर कर दिया गया था। अल्ट्रासाउंड के बाद एम्बुलेंस न मिलने पर निशा किसी तरह ट्रेन और पैदल अपने घर पहुंची। रात में दोबारा पीड़ा बढ़ने पर जब वह अस्पताल के लिए निकली तो साल्हावास रोड पर पुराने सिनेमा के पास बीच सड़क पर ही उसने बच्ची को जन्म दे दिया था।
पीएमओ बोले- छुट्टी पर हूं, संज्ञान में आने पर होगी जांच
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने जिले के स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। इस पूरे मामले पर जब नागरिक अस्पताल रेवाड़ी के पीएमओ (PMO) डॉ. सुरेंद्र यादव से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि वे पारिवारिक कारणों से 10 दिन के अवकाश पर चल रहे हैं और यह मामला अभी तक उनके आधिकारिक संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ड्यूटी पर लौटते ही मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी और कोताही बरतने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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