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अंबाला रोडवेज में बड़ा संकट: ड्राइवर-कंडक्टरों की कमी से डिपो में खड़ी हो गईं 31 बसें, कई रूट पूरी तरह बंद

May 18, 2026 3:36 PM

अंबाला। सरकारी दावों और वादों से इतर अंबाला में हरियाणा रोडवेज का डिपो इन दिनों खुद 'बीमार' चल रहा है। डिपो के पास बसों का अच्छा-खासा बेड़ा मौजूद है, लेकिन उन्हें सड़कों पर दौड़ाने वाले ड्राइवरों और कंडक्टरों का टोटा पड़ गया है। स्टाफ की इस गंभीर कमी का सीधा असर अब आम जनता की जेब और सहूलियत पर पड़ने लगा है। हालत यह है कि अंबाला डिपो की कुल 121 बसों में से महज 100 बसें ही रूट पर उतर पा रही हैं, जबकि 21 बसें सिर्फ इसलिए वर्कशॉप में खड़ी हैं क्योंकि उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। यही हाल नारायणगढ़ सब-डिपो का भी है, जहां करीब 40 बसों के बेड़े में से 10 बसें डिपो के भीतर खड़ी-खड़ी कबाड़ होने की कगार पर हैं।

वीआईपी रूटों पर कटे फेरे, ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी कटी

इस स्टाफ संकट ने केवल छोटे या स्थानीय रूटों को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि अंबाला से होकर गुजरने वाले कई बड़े और मुनाफे वाले रूटों का गणित भी बिगाड़ दिया है। चंडीगढ़-दिल्ली, दिल्ली-लुधियाना, दिल्ली-अमृतसर, दिल्ली-पटियाला, दिल्ली-जालंधर, दिल्ली-ऊना और अंबाला से जयपुर व नारनौल जैसे व्यस्त रूटों पर बसों के फेरे बेतहाशा घटा दिए गए हैं। जिन रास्तों पर पहले 8 से 10 बसें चलती थीं, वहां अब बमुश्किल 3 से 4 बसें ही फेरे लगा पा रही हैं। वहीं, कालका-कैथल, जम्मू-कटरा, नारायणगढ़-हरिद्वार और नारायणगढ़-यमुनानगर जैसे बेहद जरूरी रूट तो पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं, जिससे ग्रामीण अंचल के लोग बाकी शहरों से कट गए हैं।

नारायणगढ़ सब-डिपो का सबसे बुरा हाल, 6 महीने से हरिद्वार रूट बंद

लापरवाही की सबसे बड़ी मार नारायणगढ़ इलाके पर पड़ी है। नारायणगढ़ से चंडीगढ़ और पंचकूला के लिए पहले जहां हर वक्त 15 बसें मुस्तैद रहती थीं, वे अब सिमटकर सिर्फ दो रह गई हैं। सबसे ज्यादा आक्रोश हरिद्वार जाने वाले श्रद्धालुओं में है। नारायणगढ़ से हरिद्वार के लिए पिछले छह महीने से एक भी बस नहीं चली है। नौकरीपेशा और बुजुर्ग इस अव्यवस्था से बेहद परेशान हैं। नारायणगढ़ के रहने वाले सतीश बताते हैं कि पंचकूला ड्यूटी पर जाने के लिए अब बसों का नामोनिशान नहीं मिलता, मजबूरी में महंगे प्राइवेट वाहनों या शेयरिंग ऑटो का सहारा लेना पड़ता है। वहीं, बुजुर्ग बिमला देवी का कहना है कि सीधा रूट बंद होने से अब हरिद्वार जाने के लिए पहले अंबाला या यमुनानगर जाकर बसें बदलनी पड़ती हैं, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं का सफर दूभर हो गया है।

अधिकारियों की दलील: मुख्यालय के पाले में है गेंद

जब इस पूरे संकट और यात्रियों की दुर्दशा को लेकर अंबाला डिपो के स्थानीय अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने स्टाफ की कमी की बात को सिरे से स्वीकार किया। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि डिपो में ड्राइवरों और कंडक्टरों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस कमी के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों और चंडीगढ़ मुख्यालय को बकायदा लिखित में अवगत कराया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, जैसे ही सरकार की तरफ से नए कर्मचारियों की भर्ती या डेपुटेशन पर स्टाफ की मंजूरी मिलती है, वर्कशॉप में खड़ी बसों को तुरंत रूटों पर उतार दिया जाएगा और बंद पड़े रूटों को दोबारा चालू कर दिया जाएगा।

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