पंजाब-हरियाणा के किसानों को पराली से नहीं होगी परेशानी, बनेगी आय का साधन, पराली की ईंट से बनाए जा सकेंगे मकान
Mar 19, 2026 7:53 PM
चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा के किसानों के चेहरों पर पराली चिंता की जगह मुस्कान देने वाली है। पराली उनकी आय का साधन बनने वाली है। पराली न सिर्फ मकान बनाने के काम आएगी बल्कि उससे बनने वाला मकान मजबूत और एयरकंडीशंड जैसा अहसास दिलाने वाला होगा। यह संभव हुआ है आईआईटी जोधपुर में प्रोफेसर प्रियव्रत राउतराय के शोध से।
प्रो. राउतराय की शोध से पंजाब और हरियाणा के किसानों की पराली को लेकर तमाम मुश्किलें हल हो जाएंगी। प्रियव्रत राउतराय ने 2019 में अपने शोध का पेटेंट भी करा लिया है। उन्होंने अपने शोध में पराली से ईंट बनाने का आविष्कार किया है।
इस रिसर्च के लिए उन्हें आईआईटी हैदराबाद के डायरेक्टर से दो लाख की ग्रांट मिली। इस ग्रांट का उपयोग करते हुए उन्होंने आईआईटी हैदराबाद कैंपस में पराली की ईंट से गार्ड रूम तैयार किया। इससे लोगों को भरोसा हो गया कि पराली से ईंट तैयार की जा सकती है और उसका उपयोग निर्माण में किया जा सकता है।
पिछले दिनों पीआईबी चंडीगढ़ के सौजन्य से पत्रकारों के एक दल ने आईआईटी जोधपुर का दौरा किया। उस दौरान प्रोफेसर राउतराय ने बताया कि 2015 में वह दिल्ली में आर्किटेक्ट और प्रोडक्ट डिजाइन का काम करते थे।
इस दौरान उन्होंने पराली को लेकर खासतौर पर पंजाब और हरियाणा के किसानों की मुश्किलों को देखा। तभी उनके मन में विचार आया कि पराली से कोई ऐसा प्रोडक्ट तैयार किया जाए जिससे पराली से छुटकारा तो मिले ही साथ ही किसानों को आर्थिक फायदा भी हो।
इसके लिए उन्होंने पंजाब और हरियाणा के गांवों में जाकर किसानों से बातचीत भी की। किसानों ने बताया कि पहले वे पराली को सड़कों पर फेंक देते थे। लेकिन ऐसा करने पर पुलिस उनको परेशान करने लगी।
चूंकि धान की कटाई के बाद दूसरी फसल बोने के लिए समय बहुत कम होता है तो कोई रास्ता न बचने पर किसानों ने पराली खेत में जलाना शुरू कर दिया। इसके पश्चात प्रियव्रत राउतराय ने पराली के प्रोडक्ट पर रिसर्च शुरू किया। उनके मन में पराली से ईंट बनाने का विचार आया। 2015 में उन्होंने पराली से ईंट का पहला सैंपल बनाया।
2017 में वह आईआईटी हैदराबाद में पीएचडी करने गए। वहां उन्होंने बॉयो ब्रिक्स पर रिसर्च पेपर लिखा। 2019 में नीदरलैंड की डेल्फ़्ट यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी से पेपर प्रकाशित हुआ।
इसके बाद 2019 में आईआईटी हैदराबाद के डायरेक्टर ने दो लाख रुपये की ग्रांट दी और उससे उन्होंने आईआईटी हैदराबाद कैंपस में पराली की ईंट से गार्डरूम तैयार किया। 2022 में उनके शोध को लिए एनआईडीपीआर से वेस्ट सेस्टेनेबल मैटीरियल फॉर स्पेशल रिकगनिशन अवार्ड मिला।
कैसे बनाते हैं पराली से ईंट
पराली का सख्त वाले हिस्से को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटते हैं। सीमेंट या चूने का मिश्रण तैयार किया जाता है। इस मिश्रण को पानी के साथ मिलाकर फिक्स किया जाता है। अगर मिश्रण चूने का है तो दिन और सीमेंट का है तो चार से पांच घंटे तक मोल्ड में रखते हैं। फिर इसे 15 से 20 दिन सूखने में लगता है। वह कहते हैं कि ढाई से तीन फुट की दीवार एक साथ बना सकते हैं।
एक क्यूबिक फुट ईंट बनाने के लिए डेढ़ से दो फुट की सामग्री (पराली, एग्रो वेस्ट) की जरूरत होती है। इस ईंट की विशेषता यह है कि यह सामान्य से तीन गुणा हल्की होती है। इससे घर हल्का बनता है।
दीवारें और छत थर्मल इंसुलेशन से तैयार की जाती हैं। इसके कारण मकान पांच से छह डिग्री ठंडा रहता है। अगर मकान बड़ा होगा तो सात से आठ डिग्री तक कम गर्म होगा। इस मकान की सबसे महत्वपूर्ण खासियत यह है कि ईंटों की दीवार बनवाने पर जो खर्च आता है पराली की ईंट से बनवाने पर उसका आधा खर्च ही पड़ेगा।
वह कहते हैं कि केवल एक एहतियात बरतने की जरूरत होती है कि इसे पानी से बचाया जाए। इसके लिए दीवार की ऊपरी सतह सीमेंट या गोबर से तैयार कर सकते हैं। इसी तकनीक से तैयार ईंट से आईआईटी जोधपुर में एक कमरा तैयार किया जा रहा है।