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पीजीआईएमईआर में ट्राइसिटी का पहला ‘स्मार्ट नेक्सा’ कॉक्लियर इम्प्लांट सफल, सुनने की क्षमता बहाल करने में नई उम्मीद

Mar 17, 2026 10:43 AM

चंडीगढ़: सुनने की समस्या के इलाज के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के ईएनटी एवं हेड-नेक सर्जरी विभाग ने ट्राइसिटी का पहला अत्याधुनिक ‘स्मार्ट नेक्सा’ कॉक्लियर इम्प्लांट सफलतापूर्वक लगाया है। यह दक्षिण एशिया के शुरुआती मामलों में से एक है। इस जटिल सर्जरी को विभागाध्यक्ष और प्रसिद्ध कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जन जयमंती बक्शी और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

सर्जरी में ईएनटी विभाग की टीम के साथ ऑडियोलॉजी एंड स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धर्मवीर और डॉ. नूरैन आलम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस उपलब्धि को क्षेत्र में कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक के विस्तार और सुनने की क्षमता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बच्चों में सुनने की समस्या की जल्द पहचान जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में सुनने की समस्या अक्सर जीवन के शुरुआती महीनों में पहचान में नहीं आ पाती, जबकि यही समय मस्तिष्क और भाषाई विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। समय रहते समस्या का पता चलने और इलाज मिलने से बच्चों के बोलने, सीखने और सामाजिक विकास में होने वाली देरी को काफी हद तक रोका जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर श्रवण उत्तेजना मिलने से बच्चों की सुनने और बोलने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आता है और वे सामान्य शिक्षा प्रणाली में आसानी से शामिल हो सकते हैं।

क्या होता है कॉक्लियर इम्प्लांट

कॉक्लियर इम्प्लांट एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे उन लोगों के लिए विकसित किया गया है जिन्हें गंभीर या गहन श्रवण हानि होती है और जिन्हें सामान्य हियरिंग एड से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता। यह उपकरण क्षतिग्रस्त आंतरिक कान के हिस्सों को बाईपास कर सीधे श्रवण तंत्रिका को विद्युत संकेतों के माध्यम से सक्रिय करता है। इन संकेतों को मस्तिष्क ध्वनि के रूप में पहचानता है, जिससे व्यक्ति को बोलचाल और आसपास की आवाजें सुनने में मदद मिलती है।

अत्याधुनिक ‘नेक्सा’ तकनीक की खासियत

दुनिया की अग्रणी कंपनी कॉक्लियर लीमिटेड द्वारा विकसित ‘न्यूक्लियस नेक्सा’ कॉक्लियर इम्प्लांट प्रणाली को पिछले वर्ष वैश्विक स्तर पर लॉन्च किया गया था। इसे नई पीढ़ी की सुनने की तकनीक माना जा रहा है। यह दुनिया का पहला स्मार्ट कॉक्लियर इम्प्लांट प्लेटफॉर्म है, जिसमें उन्नत नेक्सोस चिपसेट आधारित अपग्रेडेबल फर्मवेयर, इम्प्लांट के भीतर मेमोरी और स्मार्ट सिंक जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इस तकनीक की मदद से इम्प्लांट में सुनने से संबंधित सेटिंग्स सुरक्षित रहती हैं, जिससे साउंड प्रोसेसर के बदलने या अपग्रेड होने पर मरीज जल्दी से फिर से सुनने की स्थिति में आ सकता है। साथ ही इसमें बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और उच्च प्रदर्शन सुनिश्चित करने वाली विशेष तकनीक भी मौजूद है।

विशेषज्ञता पर भरोसा कर चुना पीजीआई

मरीज के परिवार ने इस आधुनिक तकनीक को इसलिए चुना क्योंकि इसमें भविष्य के अनुसार अपग्रेड होने की क्षमता और विश्वसनीय प्रदर्शन है। साथ ही उन्होंने पीजीआईएमईआर के कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम और डॉ. जैमंती बक्शी की सर्जिकल विशेषज्ञता पर भरोसा जताया। डॉक्टरों का कहना है कि इस सफल सर्जरी के साथ ही क्षेत्र में कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक के उपयोग का एक नया दौर शुरू हुआ है, जिससे सुनने की गंभीर समस्या से जूझ रहे कई मरीजों को नई उम्मीद मिलेगी।

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