भाजपा दफ्तर को उड़ाने की कोशिश करने वाले दो मुख्य आरोपी चढ़े पंजाब पुलिस के हत्थे, पूरे मामले में अब तक कुल 7 गिरफ्तार
Apr 06, 2026 10:12 AM
चंडीगढ़: सेक्टर-37 स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पंजाब कार्यालय के बाहर 1 अप्रैल को हुए ग्रेनेड अटैक मामले की गुत्थी सुलझ गई है। शनिवार को इस मामले में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब रविवार को पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने जानकारी दी कि दफ्तर को उड़ाने की कोशिश करने वाले दो मुख्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों आरोपियों को हरियाणा के रेवाड़ी से शनिवार रात करीब 10 बजे गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान रूपनगर (रोपड़) जिले के रतनगढ़ गांव निवासी अमनप्रीत सिंह और गुरतेज सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इनमें से आरोपी अमनप्रीत सिंह ने ग्रेनेड फेंका था, जबकि गुरतेज सिंह ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर विदेश में बैठे हैंडलरों तक पहुंचाया था।
डीजीपी गौरव यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि दोनों आरोपी पिछले करीब छह महीनों से एक विदेशी नेटवर्क के संपर्क में थे, जिनसे इनकी पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। जांच में सामने आया है कि गुरतेज सिंह को 28 मार्च को विशेष तौर पर हथियार और ग्रेनेड लाने का काम सौंपा गया था। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि गुरतेज सिंह ने अपने साथियों रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा के साथ मिलकर 28 मार्च को एसबीएस नगर के गांव भरापुर में जसवीर उर्फ जस्सी से हथियार और ग्रेनेड की खेप प्राप्त की थी और बाद में अमनप्रीत सिंह को साथ लेकर वारदात को अंजाम दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि अमनप्रीत सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके खिलाफ मोहाली में चोरी और हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में स्नैचिंग के मामले दर्ज हैं। वहीं, गुरतेज सिंह विदेश में बैठे एक हैंडलर के संपर्क में था, जिसने उसे हमले की योजना, रेकी और क्रियान्वयन से जुड़े निर्देश दिए थे।
विदेश में बैठे आईएसआई समर्थित हैंडलरों के इशारे पर रची गई साजिश
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे मॉड्यूल के तार विदेशों से जुड़े हुए हैं। शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क को पुर्तगाल और जर्मनी में बैठे हैंडलर संचालित कर रहे थे, जिनके संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से जुड़े पाए गए हैं। डीजीपी के अनुसार, आरोपियों को पुर्तगाल स्थित आईएसआई समर्थित विदेशी हैंडलर बलजोत सिंह उर्फ जोत और जर्मनी से हरजीत सिंह लाडी द्वारा 2 लाख रुपये का लालच देकर इस हमले के लिए उकसाया गया था। उन्होंने बताया कि विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए कई स्तरों (कटआउट्स और सब-मॉड्यूल) का इस्तेमाल किया गया, ताकि नेटवर्क की परतें छिपी रहें।
दूर बैठे हैंडलरों ने सिखाई ग्रेनेड एक्टिव करने की प्रक्रिया
इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है कि पूरा ऑपरेशन तकनीकी माध्यमों के जरिए संचालित किया गया। आरोपियों को ऑनलाइन निर्देश दिए गए, यहां तक कि ग्रेनेड को सक्रिय करने की प्रक्रिया भी दूर बैठे हैंडलर ने समझाई थी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को इस काम के लिए पैसे देने का लालच भी दिया गया था। पुलिस और काउंटर-इंटेलिजेंस की टीमें फिलहाल इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि यह मामला एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा है।
हथियार सप्लाई और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले पांच आरोपी एक दिन पहले किए गए गिरफ्तार
इस मामले में अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले पकड़े गए पांच आरोपियों की भूमिका हथियारों की आपूर्ति और लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराने की थी। इनकी पहचान गांव माजरी (एसबीएस नगर) के बलविंदर लाल उर्फ शम्मी, गांव भरापुर (एसबीएस नगर) के जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, गांव सुजावलपुर (एसबीएस नगर) के चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, गांव ठाणा (शिमला) के रूबल चौहान और धूरी (संगरूर) के मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा के रूप में हुई थी।
ये सभी आरोपी पंजाब और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखते हैं और नेटवर्क में विभिन्न स्तरों पर अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। पुलिस ने इन 5 आरोपियों के कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड, .30 बोर की जिगाना पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि हथियारों और विस्फोटकों की खेप कई लोगों के जरिए आगे बढ़ाई गई, ताकि असली साजिशकर्ताओं तक सीधे पहुंचना मुश्किल हो सके।
1 अप्रैल को हुए ग्रेनेड धमाके में गाड़ियों के टूट गए थे शीशे, कोई हताहत नहीं
घटना 1 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे की है, जब सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर विस्फोट हुआ था। धमाके के कारण आसपास खड़ी गाड़ियों के शीशे टूट गए और एक स्कूटर भी क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। शुरुआती तौर पर इसे देसी बम माना गया था, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि यह हैंड ग्रेनेड था। डीजीपी के मुताबिक, 1 अप्रैल को रेकी के बाद अमनप्रीत सिंह ने ग्रेनेड फेंका, जबकि गुरतेज सिंह ने हैंडलर के निर्देश पर पूरी घटना को मोबाइल में रिकॉर्ड किया और दोनों मौके से फरार हो गए थे।
हमले के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति नीले रंग का ग्रेनेड फेंकते हुए दिखाई दिया, जबकि दूसरा उसकी रिकॉर्डिंग कर रहा था। सीसीटीवी फुटेज में भी संदिग्धों को सड़क पार कर भागते हुए देखा गया था, जिससे जांच एजेंसियों को महत्वपूर्ण सुराग मिले। डीजीपी गौरव यादव ने चंडीगढ़ और हरियाणा के डीजीपी का धन्यवाद करते हुए इस पूरे मामले का पर्दाफाश करने और आरोपियों को पकड़ने में चंडीगढ़ पुलिस और हरियाणा पुलिस की एसटीएफ की अहम भूमिका की सराहना की।