महाकुंभ के चर्चित 'IIT बाबा' का नया अवतार, झज्जर के अभय सिंह ने कर्नाटक की प्रतीका से रचाई शादी
Apr 06, 2026 5:30 PM
झज्जर। झज्जर की गलियों से निकलकर IIT बॉम्बे और फिर वहां से महाकुंभ की धूनी तक पहुंचने वाले अभय सिंह, जिन्हें दुनिया 'IIT बाबा' के नाम से जानती है, अब अपनी नई गृहस्थी बसा चुके हैं। संन्यास और आध्यात्म के दावों के बीच अभय के विवाह की खबर ने सबको चौंका दिया है। हाल ही में अभय अपनी पत्नी प्रतीका के साथ झज्जर स्थित अपने पिता के चैंबर पहुंचे, जहां पहली बार इस शादी का सार्वजनिक खुलासा हुआ। दोनों ने इसी साल फरवरी में प्रेम और परंपरा के संगम के साथ अपनी नई पारी शुरू की है।
अघंजर महादेव मंदिर में सात फेरे, फिर कोर्ट मैरिज
अभय और प्रतीका की शादी किसी बड़े शोर-शराबे के बजाय बेहद शांत और आध्यात्मिक तरीके से संपन्न हुई। 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के दिन हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध अघंजर महादेव मंदिर में दोनों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शादी की। इसके ठीक चार दिन बाद, 19 फरवरी को उन्होंने कानूनी रूप से अपनी शादी को रजिस्टर भी करवाया। झज्जर पहुंचे इस जोड़े ने बताया कि वे अब अपने माता-पिता का आशीर्वाद लेने आए हैं और जल्द ही समाज सेवा के कार्यों में जुटेंगे।
कौन हैं प्रतीका और कैसे हुई मुलाकात?
अभय सिंह की पत्नी प्रतीका मूल रूप से दक्षिण भारत (कर्नाटक) की रहने वाली हैं। पेशे से इंजीनियर प्रतीका ने बताया कि अभय से उनकी मुलाकात करीब एक साल पहले हुई थी। प्रतीका के अनुसार, उन्हें अभय का सरल स्वभाव और उनके विचार बेहद पसंद आए, जिसके बाद दोनों ने जीवन भर साथ चलने का फैसला किया। दिलचस्प बात यह है कि अब यह जोड़ा मिलकर एक 'सनातन यूनिवर्सिटी' बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जहाँ आधुनिक शिक्षा के साथ प्राचीन भारतीय ज्ञान का मेल होगा।
35 लाख का पैकेज छोड़ बने थे 'बाबा'
अभय सिंह की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। साल 2008 में IIT-JEE में 731वीं रैंक हासिल करने वाले अभय ने IIT बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कनाडा की एक नामी एयरक्राफ्ट कंपनी में करीब 35 लाख रुपये के सालाना पैकेज पर काम किया। लॉकडाउन के दौरान भारत लौटने के बाद उनका झुकाव आध्यात्म की ओर हुआ और वे जूना अखाड़े से जुड़ गए। महाकुंभ के दौरान जब उनकी शैक्षणिक योग्यता का पता चला, तो मीडिया ने उन्हें 'IIT बाबा' का खिताब दे दिया। हालांकि, बाद में कुछ विवादों के चलते उन्हें अखाड़े से बाहर भी होना पड़ा था।