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गैस संकट का अंत: 3 लाख करोड़ का आयात बिल बचाने के लिए कोयले का 'डबल उपयोग' शुरू

May 15, 2026 12:01 PM

दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की अनिश्चितता ने भारत को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। मोदी सरकार अब देश के भीतर मौजूद कोयले के विशाल भंडार का उपयोग केवल बिजली बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि घरेलू गैस (LPG) की किल्लत दूर करने के लिए भी करेगी। भारत के पास करीब 401 अरब टन कोयला और 47 अरब टन लिग्नाइट का खजाना मौजूद है, जो अब तक केवल पावर प्लांट्स तक सीमित था। लेकिन अब 'गैसीफिकेशन' की क्रांतिकारी तकनीक के जरिए इस खजाने से 'सिनगैस' तैयार की जाएगी, जो विदेशी ईंधन पर हमारी निर्भरता को जड़ से खत्म करने का सामर्थ्य रखती है।

क्या है 'गैसीफिकेशन' तकनीक? बिना जलाए कोयले से बनेगी गैस

आमतौर पर हम कोयले को जलता हुआ देखते हैं, लेकिन इस नई तकनीक में कोयले को जलाया नहीं जाता। 'गैसीफिकेशन' प्रक्रिया में कोयले को उच्च दबाव और तापमान पर रासायनिक प्रतिक्रियाओं से गुजारा जाता है, जिससे वह गैस (सिनगैस) में तब्दील हो जाता है। इस सिनगैस का इस्तेमाल न केवल ईंधन के तौर पर किया जा सकता है, बल्कि इससे यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण रसायन भी तैयार किए जा सकेंगे। यह तकनीक पर्यावरण के लिहाज से भी पारंपरिक कोयला दहन के मुकाबले अधिक स्वच्छ मानी जाती है।

3 लाख करोड़ की चपत से बचेगा देश, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

भारत आज भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों का मुंह ताकता है। वित्तीय वर्ष 2025 के आंकड़े डराने वाले हैं, जहां एलएनजी, अमोनिया और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर देश को लगभग 3 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे इस बोझ को कम करने के लिए सरकार ने 8 बड़ी परियोजनाओं को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होते हैं, तो भारत न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि आम जनता को भी सस्ती और सुलभ गैस मिल सकेगी।

मास्टर प्लान तैयार: 8 मेगा प्रोजेक्ट्स पर युद्धस्तर पर काम शुरू

सरकार ने इस मिशन को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में 8 विशेष परियोजनाओं को चिह्नित किया गया है, जहाँ कोयला गैसीफिकेशन प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य कोयले का 'वैल्यू एडिशन' करना है। जैसे-जैसे ये प्लांट चालू होंगे, भारत यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट जैसे उत्पादों के मामले में भी निर्यातक बनने की राह पर अग्रसर होगा। यह कदम भविष्य में न केवल रसोई गैस की कीमतों को स्थिर करेगा, बल्कि घरेलू उद्योगों को भी नई संजीवनी प्रदान करेगा।

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