उन्नाव बलात्कार मामले में कुलदीप सेंगर को झटका: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया
May 15, 2026 1:15 PM
नई दिल्ली: उन्नाव बलात्कार मामले में शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया जिसमें सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित किया गया था। अदालत ने हाईकोर्ट को मामले पर नए सिरे से सुनवाई करने और सेंगर की अपील पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया है। यह मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से जुड़ा है और देशभर में लंबे समय तक चर्चा का केंद्र बना रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को दिए निर्देश
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि वह सेंगर की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर मुख्य याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने का प्रयास करे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि इतने कम समय में मुख्य अपील पर फैसला संभव नहीं हो तो हाईकोर्ट ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले सजा निलंबन याचिका पर नया आदेश पारित करे।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए दोबारा सुनवाई कर सकता है। इस आदेश के बाद अब सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
पॉक्सो कानून की व्याख्या पर भी होगी सुनवाई
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कानूनी मुद्दे पर भी विचार करने को कहा। प्रधान न्यायाधीश ने दिल्ली हाईकोर्ट से पूछा कि क्या किसी विधायक को पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमे के दौरान “लोक सेवक” माना जा सकता है।
दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने 23 दिसंबर 2025 के आदेश में कहा था कि कुलदीप सिंह सेंगर को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 (सी) के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के अनुसार एक निर्वाचित प्रतिनिधि “लोक सेवक” की परिभाषा में नहीं आता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सजा निलंबन को लेकर टिप्पणी की थी। अब इस कानूनी पहलू पर भी नए सिरे से बहस होगी।
पिछले साल हाईकोर्ट ने दी थी राहत
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेंगर की अपील लंबित रहने तक उसकी आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी थी। अदालत ने कहा था कि सेंगर पहले ही सात साल और पांच महीने की सजा काट चुका है। इसके बाद उसे राहत मिलने की संभावना बनी थी।
हालांकि इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सीबीआई ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि इतने गंभीर मामले में सजा निलंबित करना उचित नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 29 दिसंबर को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और स्पष्ट किया था कि सेंगर को जेल से रिहा नहीं किया जाएगा।
देशभर में हुआ था विरोध
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता के परिवार, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और कई सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। लोगों का कहना था कि इस तरह के गंभीर मामलों में दोषी करार दिए गए व्यक्ति को राहत देना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
उन्नाव बलात्कार मामला पहले भी राष्ट्रीय राजनीति और कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा मुद्दा बना था। इस मामले में पीड़िता और उसके परिवार ने लगातार न्याय की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है और अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
क्या है उन्नाव बलात्कार मामला
उन्नाव जिले का यह मामला वर्ष 2017 में सामने आया था। आरोप था कि तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार किया। मामला सामने आने के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा विवाद हुआ था।
बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। अदालत ने सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जेल में बंद है। यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक प्रभाव और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लंबे समय तक राष्ट्रीय बहस का विषय बना रहा।