फरीदाबाद में पंचर की दुकान और सरहद पार जासूसी: नचौली से पकड़ा गया पाकिस्तानी एजेंट
Mar 23, 2026 10:49 AM
फरीदाबाद। फरीदाबाद का नचौली गांव उस वक्त सन्न रह गया जब सादे कपड़ों में पहुंची गाजियाबाद पुलिस ने एक पेट्रोल पंप पर पंचर लगाने वाले शख्स को 'देशद्रोह' के आरोप में दबोच लिया। नौशाद अली उर्फ लालू, जो पिछले तीन महीनों से आम कामगार बनकर यहां रह रहा था, असल में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा निकला। डीसीपी सिटी धवल जायसवाल के मुताबिक, यह गिरोह देश के संवेदनशील इलाकों, रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों की आवाजाही पर नजर रखकर उनकी तस्वीरें और वीडियो व्हाट्सएप के जरिए पाकिस्तान भेजता था।
रेलवे स्टेशनों पर लगा दिए थे 'लाइव' जासूसी कैमरे
जांच में जो खुलासा हुआ है वह बेहद चौंकाने वाला और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाने वाला है। इस गैंग ने दिल्ली कैंट और हरियाणा के सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास सोलर पावर से चलने वाले हाई-टेक कैमरे इंस्टॉल कर दिए थे। इन कैमरों का 'लाइव एक्सेस' सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के पास था। यानी दिल्ली और हरियाणा के स्टेशनों पर क्या हलचल हो रही है, उसे सीमा पार बैठा दुश्मन लाइव देख रहा था। पुलिस ने इन कैमरों को रिकवर कर लिया है और अब इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
सादे कपड़ों में पहुंची पुलिस और ऐसे खुला राज
बीती 16 मार्च की शाम जब गाजियाबाद पुलिस नचौली पहुंची, तो नौशाद को भनक तक नहीं लगी। पुलिसकर्मी आम लोगों की तरह पेट्रोल पंप कर्मचारियों से पूछताछ कर रहे थे और नौशाद बगल में ही हाथ बांधे खड़ा तमाशा देख रहा था। जब कर्मचारियों ने बताया कि पंचर की दुकान चलाने वाले का नाम ही नौशाद अली है, तब पुलिस ने उसे दबोच लिया। जांच में सामने आया कि बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला नौशाद पहले कोलकाता में था, जिसे उसके गांव के ही एक परिचित मुमताज ने वापस बुलाकर इस पंप पर काम दिलवाया था।
पैसों का लालच और देश से गद्दारी
पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया है कि उन्हें एक फोटो या वीडियो भेजने के बदले 4 से 6 हजार रुपये मिलते थे। वहीं, जासूसी कैमरा इंस्टॉल करने के लिए 10 से 15 हजार रुपये का अलग से भुगतान किया जाता था। अब तक इस गिरोह के 22 सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें मेरठ का मास्टरमाइंड सुहेल भी शामिल है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि क्या फरीदाबाद या आसपास के अन्य इलाकों में भी ऐसे और कैमरे लगाए गए हैं या कोई और स्लीपर सेल सक्रिय है।