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किसान नेता बोले— मंडियों में 42% गेहूं अब भी खुले में, उठान न हुआ तो करेंगे चक्का जाम

May 07, 2026 4:53 PM

कैथल। अनाज मंडियों में गेहूं की धीमी खरीद, लचर उठान और भुगतान में हो रही देरी ने किसानों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (4981) के बैनर तले सोमवार को दर्जनों किसानों ने कलायत मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोटूक चेतावनी दी कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो एक बड़ा राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।

मंडी में पड़ा है 42% गेहूं, दावे केवल कागजों पर

धरना-प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रहे जिला प्रधान गुरनाम सिंह सहारण ने सरकारी आंकड़ों की पोल खोलते हुए कहा कि मंडियों के हालात बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भर की मंडियों में अभी तक महज 50 फीसदी गेहूं का ही उठान हो पाया है। करीब 42 फीसदी फसल अब भी खुले आसमान के नीचे उठान के इंतजार में पड़ी है, जबकि 8 फीसदी गेहूं की तो अब तक तुलाई भी नहीं हुई है। किसान नेताओं ने कहा कि मंडी में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है और किसान अपनी उपज की सुरक्षा को लेकर रात-रात भर जागने को मजबूर है।

"20 दिन बीते, खाते अब भी खाली"

सरकार के '72 घंटे में भुगतान' के वादे पर तंज कसते हुए किसानों ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक जुमला बनकर रह गया है। गुरनाम सिंह ने बताया कि कई किसानों को अपनी फसल बेचे हुए 20 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन उनके बैंक खातों में फूटी कौड़ी तक नहीं आई है। जिन किसानों के खाते में पैसे पहुँचे भी हैं, वे बैंकों की लंबी कतारों और नकदी की कमी के चलते उसे निकाल नहीं पा रहे। किसानों का कहना है कि उन्हें खेतों का ठेका भरना है, आढ़तियों का हिसाब करना है और घर के खर्च चलाने हैं, लेकिन भुगतान न होने से वे आर्थिक संकट में घिर गए हैं।

नियमों का विरोध और बिजली की समस्या

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मंडी में थोपे गए नए नियमों को भी किसान विरोधी करार देते हुए उन्हें तुरंत रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही, यूनियन ने गांव खरक पंडवा, शिमला और ढुण्डवा में बिजली की भारी कटौती का मुद्दा भी उठाया। किसानों का कहना है कि भीषण गर्मी के बावजूद इन गांवों में बिजली की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही, जिससे आम जनजीवन और खेती-बाड़ी प्रभावित हो रही है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

ब्लॉक प्रधान जिले सिंह मोर और सुरेंद्र चौशाला ने कहा कि किसान इस बार पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग और मार्केट कमेटी अपनी कार्यशैली सुधारें, वरना किसान सड़कों पर उतरेंगे। इस मौके पर प्रीतम सिंह खेड़ी, लाम्बा जोरा सिंह मोर, कृष्ण मोर, राजेंद्र जागलान, शमशेर दुब्बल, बलकार कोलेखा और प्रदीप कुराड सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

मार्केट कमेटी के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए यूनियन ने स्पष्ट कर दिया कि यदि अगले कुछ दिनों में भुगतान और उठान की प्रक्रिया तेज नहीं हुई, तो कलायत से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन पूरे जिले और फिर प्रदेश में फैल जाएगा।

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