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₹1 का लालच और बैंक खाता साफ! हरियाणा पुलिस ने मोबाइल यूजर्स को दी बड़ी चेतावनी

Mar 27, 2026 4:34 PM

फतेहाबाद। मोबाइल स्क्रीन पर चमकते "मात्र 1 रुपये में प्रीमियम मेंबरशिप" या "3 दिन का मुफ्त ट्रायल" जैसे विज्ञापन अब आपकी मेहनत की कमाई के लिए काल बन रहे हैं। फतेहाबाद पुलिस की साइबर सेल ने तकनीकी विश्लेषण के बाद खुलासा किया है कि साइबर अपराधी अब मनोवैज्ञानिक दबाव के बजाय 'लालच' को हथियार बना रहे हैं। जैसे ही कोई यूजर इन लुभावने ऑफर्स के चक्कर में किसी संदिग्ध एप को डाउनलोड करता है, उसके वित्तीय डेटा की चोरी का खेल शुरू हो जाता है।

कैसे बुना जाता है ठगी का यह मकड़जाल?

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ठगी बेहद शातिर तरीके से अंजाम दी जाती है। सबसे पहले सोशल मीडिया या विज्ञापनों के जरिए यूजर को एक ऐसी एप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जो एडिटिंग, गेमिंग या ओटीटी सेवाओं का वादा करती है। शुरुआती प्रक्रिया में यूजर से कार्ड या यूपीआई की डिटेल मांगी जाती है, यह कहकर कि वेरिफिकेशन के लिए सिर्फ 1 रुपये कटेगा।

असली खेल यहीं से शुरू होता है। जैसे ही आप भुगतान की अनुमति देते हैं, बैकग्राउंड में 'ऑटो-रिन्यूअल' या 'सब्सक्रिप्शन' सक्रिय हो जाता है। ट्रायल पीरियड (अक्सर 3 से 7 दिन) खत्म होते ही, आपके बैंक खाते से हजारों रुपये का प्रीमियम शुल्क अपने आप कट जाता है, और कई बार तो यूजर को इसका पता हफ्तों बाद चलता है।

अनचाहे सब्सक्रिप्शन: आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव

फतेहाबाद पुलिस ने बताया कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये एप्स अक्सर विदेशी सर्वर से संचालित होते हैं, जिससे रिफंड पाना लगभग असंभव हो जाता है। पुलिस के पास पहुंच रही शिकायतों में देखा गया है कि लोग छोटे-छोटे अमाउंट कटने पर ध्यान नहीं देते, जिसका फायदा उठाकर ठग धीरे-धीरे बड़ी रकम पार कर देते हैं। इससे न केवल आर्थिक चोट पहुंचती है, बल्कि पीड़ित को भारी मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है।

बचाव के लिए पुलिस की 'गोल्डन टिप्स'

साइबर सेल ने जनता से अपील की है कि वे अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर लापरवाही न बरतें।

प्ले स्टोर का ही करें उपयोग: किसी भी अनजान लिंक या ब्राउज़र से एपीके (APK) फाइल डाउनलोड न करें।

परमिशन चेक करें: एप इंस्टॉल करते समय यह जरूर देखें कि वह आपकी गैलरी, कॉन्टैक्ट या बैंक मैसेज की परमिशन क्यों मांग रही है।

पेमेंट सेटिंग्स: अपने यूपीआई या बैंकिंग एप में 'ऑटो-पे' (Auto-Pay) सेक्शन को चेक करें और किसी भी अनचाहे मैंडेट को तुरंत रद्द करें।

सावधानी ही सुरक्षा: अगर आपके साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत 1930 डायल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

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