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गुरुग्राम में बिजली का नया 'पावर' प्लान: 24 करोड़ से बनेंगे 3 नए सब-स्टेशन, लो-वोल्टेज से मिलेगी मुक्ति

Apr 07, 2026 3:05 PM

गुरुग्राम। साइबर सिटी से सटे ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी इलाकों—पटौदी और फर्रुखनगर में बिजली की किल्लत अब गुजरे जमाने की बात होने वाली है। क्षेत्र में बढ़ती आबादी, नए कृषि कनेक्शनों और छोटी औद्योगिक इकाइयों के कारण बिजली की मांग में आए उछाल को देखते हुए दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। विभाग ने इस क्षेत्र के तीन गांवों में 33 kV के नए सब-स्टेशन स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। करीब 24 करोड़ रुपये की इस योजना का सीधा लाभ हजारों उपभोक्ताओं को बेहतर वोल्टेज और निर्बाध आपूर्ति के रूप में मिलेगा।

पुरानी लाइनों का जाल और लो-वोल्टेज की किचकिच

वर्तमान में पटौदी और फर्रुखनगर के कई गांवों में बिजली की सप्लाई काफी पुरानी 11 kV लाइनों के जरिए हो रही है। लाइनें लंबी होने के कारण आखिरी छोर पर बैठे उपभोक्ताओं को अक्सर लो-वोल्टेज की शिकायत रहती है। इसके अलावा, गर्मी के मौसम में ओवरलोडिंग के चलते बार-बार होने वाली ट्रिपिंग स्थानीय निवासियों और किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई थी। नए सब-स्टेशन बनने से बिजली का लोड बंट जाएगा और वितरण प्रणाली पहले से कहीं अधिक संतुलित हो जाएगी।

कहां कितना होगा खर्च और क्या है पूरा खाका?

इस परियोजना के तहत तीन अलग-अलग स्थानों पर निर्माण कार्य किया जाएगा:

दौलताबाद (पटौदी): यहां करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से सब-स्टेशन बनेगा, जिसे मऊ स्थित 220 kV स्टेशन से जोड़ा जाएगा। सिवाड़ी (फर्रुखनगर): 8 करोड़ रुपये के बजट से बनने वाले इस स्टेशन को माछरौली स्टेशन से कनेक्टिविटी मिलेगी। जसात (पटौदी): यहां सबसे अधिक 9 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे 132 kV गंगायचा स्टेशन से लिंक किया जाएगा। आधुनिक तकनीक से लैस इन पावर हाउस सिस्टम के जुड़ते ही क्षेत्र में बिजली का बैकअप और फ्रीक्वेंसी दोनों में सुधार होगा।

फसल कटाई का इंतजार, फिर शुरू होगा काम

बिजली निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कागजी कार्रवाई और टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन धरातल पर लाइन बिछाने का काम अभी शुरू नहीं किया गया है। इसका कारण खेतों में खड़ी फसलें हैं। चूंकि बिजली की लाइनें खेतों के बीच से होकर गुजरनी हैं, इसलिए निगम ने किसानों के हित में फैसला लिया है कि फसल कटाई के दौरान काम रोककर रखा जाए। जैसे ही खेतों से फसल उठ जाएगी, युद्धस्तर पर खंभे गाड़ने और तार खींचने का काम शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों का लक्ष्य है कि आने वाले पीक सीजन से पहले इस ढांचे को काफी हद तक तैयार कर लिया जाए।

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