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सिरसा के बागवानों की बल्ले-बल्ले: 26 करोड़ की लागत से लगेगा प्रदेश का पहला आधुनिक किन्नू जूस प्लांट

Apr 07, 2026 4:17 PM

सिरसा। हरियाणा के 'सिट्रस बेल्ट' कहे जाने वाले सिरसा जिले के किसानों के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी सौगात लेकर आया। प्रदेश सरकार ने फल उत्पादकों को बिचौलियों के चंगुल से निकालने और उन्हें उनकी फसल का वाजिब दाम दिलाने के लिए सिरसा में एक अत्याधुनिक किन्नू जूस प्रसंस्करण संयंत्र लगाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि यह संयंत्र न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-harvest loss) को भी न्यूनतम स्तर पर ले आएगा।

पीपीपी मॉडल पर 33 साल का 'रोडमैप'

यह परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के एक अनूठे मॉडल पर आधारित है। हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव फेडरेशन (HDDCF) इसके लिए सिरसा स्थित वीटा मिल्क प्लांट परिसर में अपनी करीब तीन एकड़ की प्राइम लोकेशन वाली जमीन उपलब्ध कराएगा। वहीं, निजी साझीदार (Private Partner) इसमें आधुनिक मशीनरी, सिविल स्ट्रक्चर और तकनीकी संचालन का जिम्मा संभालेगा। इस समझौते की अवधि 33 साल तय की गई है, जिससे लंबे समय तक प्रदेश के बागवानों को एक सुरक्षित बाजार मिल सकेगा।

सिरसा का दबदबा: उत्पादन में 55 फीसदी की हिस्सेदारी

हरियाणा में किन्नू की खेती का ग्राफ पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। एमडी रोहित यादव के मुताबिक, प्रदेश में सालाना लगभग 4.40 लाख मीट्रिक टन किन्नू का उत्पादन होता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कुल उत्पादन का अकेले 55 प्रतिशत हिस्सा सिरसा जिले से आता है। अब तक प्रसंस्करण इकाई (Processing Unit) न होने के कारण किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर पड़ोसी राज्यों के व्यापारियों को बेचनी पड़ती थी या फिर फसल के खराब होने का डर बना रहता था। नया प्लांट लगने से अब 'खेत से सीधे फैक्ट्री' का सपना साकार होगा।

ग्लोबल मार्केट में 'वीटा' की ब्रांडिंग से बढ़ेगा रुतबा

सरकार की योजना इस जूस प्लांट को केवल स्थानीय खपत तक सीमित रखने की नहीं है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार होने वाले इस जूस की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगी। वीटा के मौजूदा नेटवर्क का इस्तेमाल कर इस जूस की ब्रांडिंग की जाएगी, जिससे हरियाणा के किन्नू की पहचान विदेशों तक पहुंचेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होगा, बल्कि कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक सेक्टर में भी निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

फिलहाल, मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य की समयसीमा तय की जाए ताकि आने वाले सीजन में बागवानों को इस अत्याधुनिक सुविधा का लाभ मिल सके।

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