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HBSE का बड़ा फैसला: हरियाणा में 9वीं-10वीं के छात्रों को अब पढ़ने होंगे 7 विषय

Mar 22, 2026 10:21 AM

हरियाणा। भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं के लिए परीक्षा और पाठ्यक्रम की नई लकीर खींच दी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सिफारिशों को जमीन पर उतारते हुए बोर्ड ने पासिंग नियमों में आमूलचूल बदलाव किए हैं। अब हाईस्कूल की दहलीज पर खड़े विद्यार्थियों को 6 के बजाय 7 विषयों का बोझ उठाना होगा, लेकिन इस 'बोझ' को कम करने के लिए बोर्ड ने एक स्मार्ट कैलकुलेशन भी पेश की है। नई व्यवस्था के तहत छात्रों की भाषाई पकड़ को मजबूत करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।

क्या है त्रिभाषा फॉर्मूला और कैसे बदलेंगे विषय?

बोर्ड के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अनिवार्य विषयों की सूची अब लंबी हो गई है। हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान तो पहले की तरह ही रहेंगे, लेकिन अब इनके साथ एक 'तीसरी भाषा' का चयन करना अनिवार्य होगा। यानी अब छात्रों को कुल तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल छात्रों की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वे बहुभाषी होकर वैश्विक स्तर पर खुद को बेहतर तरीके से पेश कर सकेंगे। विभाग ने साफ कर दिया है कि यह नियम रट्टा मार पढ़ाई के बजाय विषयों की गहरी समझ विकसित करने के लिए लाया गया है।

'बेस्ट सिक्स' से मिलेगी राहत, फेल होने का डर होगा कम

भले ही विषयों की संख्या 7 कर दी गई हो, लेकिन रिजल्ट तैयार करने की पद्धति छात्रों के हक में नजर आ रही है। बोर्ड ने 'बेस्ट सिक्स' (Best Six) सिस्टम लागू किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर कोई छात्र सात विषयों की परीक्षा देता है, तो उसके परिणाम की गणना केवल उन 6 विषयों से की जाएगी जिनमें उसके सबसे अधिक अंक आए होंगे। इससे छात्रों पर से अतिरिक्त विषय का तनाव कम होगा और अगर किसी एक विषय में अंक थोड़े कम भी रह जाते हैं, तो उसका असर ओवरऑल प्रतिशत (Percentage) पर नहीं पड़ेगा।

नए सत्र से लागू होगी व्यवस्था, स्कूलों को तैयारी के निर्देश

शिक्षा विभाग इस बदलाव को लेकर पूरी तरह तैयार है। यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त सरकारी और निजी स्कूलों में एक साथ लागू कर दी जाएगी। भिवानी बोर्ड का मानना है कि इस लचीली शिक्षा प्रणाली से ड्रॉपआउट रेट में कमी आएगी और छात्र अपनी पसंद के विषयों पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। स्कूलों को जल्द ही नए पाठ्यक्रम और विषय चयन की विस्तृत गाइडलाइन भेज दी जाएगी ताकि सत्र की शुरुआत से ही छात्र मानसिक रूप से तैयार रहें।

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