मानसून 2026: हरियाणा में बाढ़ और सूखे से निपटने का मास्टर प्लान तैयार, 24 घंटे सक्रिय रहेंगे कंट्रोल रूम
Apr 29, 2026 5:51 PM
हरियाणा। हरियाणा में इस बार मानसून का सामना करने के लिए प्रशासन ने 'जुगाड़' के बजाय ठोस रणनीतिक तैयारी की है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आपदा चाहे बाढ़ की हो या सूखे की, रिस्पॉन्स टाइम (प्रतिक्रिया समय) न्यूनतम होना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी संभागीय आयुक्तों और उपायुक्तों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। पंचकूला स्थित राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) को पहले ही 24 घंटे के लिए सक्रिय कर दिया गया है।
मई के मध्य तक जिलों में सक्रिय होंगे कंट्रोल रूम
प्रशासनिक मुस्तैदी का आलम यह है कि सभी जिला अधिकारियों को मध्य मई तक अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करने को कहा गया है। इन केंद्रों पर न केवल इंटरनेट और बिजली का बैकअप होगा, बल्कि नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान रियल-टाइम में हो सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि किसी भी अप्रिय घटना की सूचना सीधे चंडीगढ़ मुख्यालय और राहत दलों तक बिना किसी देरी के पहुँचे।
विभागों के बीच बंटी जिम्मेदारी
इस बार एक्शन प्लान में विभागों के बीच की खींचतान खत्म करने के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी गई है:
कृषि विभाग: सूखे की स्थिति में फसल आकस्मिक योजना और जल संरक्षण का जिम्मा संभालेगा।
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग: नहरों के तटबंधों की मजबूती, ड्रेनेज की सफाई और पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग: खोज-बचाव अभियान और महामारी की रोकथाम के लिए मेडिकल टीमों की अग्रिम तैनाती करेंगे।
तकनीक और राहत पर जोर
सरकार की कार्ययोजना में केवल कागजी निर्देश नहीं, बल्कि जमीनी अभ्यास भी शामिल है। संवेदनशील क्षेत्रों में मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है और एनडीआरएफ (NDRF) के साथ समन्वय स्थापित कर लिया गया है। जलाशयों के जलस्तर की निगरानी अब डिजिटल माध्यमों से होगी ताकि समय रहते प्रभावित इलाकों को खाली कराया जा सके। इसके साथ ही, बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों और कीट नियंत्रण के लिए भी दवाओं का स्टॉक पहले से ही तैयार रखने को कहा गया है।
सूखे और लू पर भी नजर
चूँकि हरियाणा में मौसम का मिजाज तेजी से बदलता है, इसलिए प्लान में केवल बाढ़ ही नहीं बल्कि 'लू' (Heatwave) और सूखे के प्रबंधन पर भी विशेष प्रावधान हैं। बारिश के पैटर्न पर नजर रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल के टैंकर और पशुओं के चारे की व्यवस्था को लेकर भी जिला प्रशासन को सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—बेहतर समन्वय और सक्रिय योजना के जरिए जान-माल के नुकसान को शून्य के करीब लाना।