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Chandigarh News: स्ट्रीट वेंडर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, नगर निगम को लगाई फटकार, सभी मामले निपटाने के दिए निर्देश

Apr 29, 2026 5:20 PM

चंडीगढ़: चंडीगढ़ में स्ट्रीट वेंडर्स के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निगम कमिश्नर द्वारा दाखिल हलफनामे को “बेहद अस्पष्ट” बताते हुए नाराजगी जताई और कहा कि इसमें जमीनी स्थिति, कोर्ट के आदेशों के पालन और की गई कार्रवाई का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। अदालत ने अधिकारियों को दो दिन के भीतर विस्तृत और स्पष्ट हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को आखिरी मौका देते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी।

5 मई को होगी अगली सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को तय की गई है। अदालत ने कहा कि अगली तारीख तक नगर निगम को सभी जरूरी जानकारियों के साथ अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश

“मलकित सिंह एवं अन्य बनाम यूटी चंडीगढ़” मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि स्ट्रीट वेंडर्स से जुड़े सभी लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटाया जाए। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के मामलों को लंबित रखना स्वीकार्य नहीं है।

वेंडर्स के पुनर्वास पर भी जोर

सुप्रीम कोर्ट ने पहले की सुनवाई में यह भी कहा था कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून के अनुसार हो सकती है, लेकिन वेंडर्स को दूसरी जगह भेजने से उनके रोजगार पर असर पड़ता है। इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि नई वेंडिंग साइट्स के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि वहां व्यापार प्रभावित न हो।

प्रशासन से मांगी गई विस्तृत जानकारी

अदालत ने प्रशासन से यह भी पूछा कि हाईकोर्ट और शिकायत निवारण समिति के पास कितने मामले लंबित हैं और अब तक कितने आवेदन प्राप्त हुए हैं। कोर्ट ने इन सभी पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी देने को कहा है, ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

वेंडर्स की आजीविका से जुड़ा मुद्दा

यह मामला हजारों स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका से जुड़ा है, जो शहर के अलग-अलग हिस्सों में अपना रोजगार चलाते हैं। कोर्ट के सख्त रुख से यह संकेत मिला है कि प्रशासन को अब इस मुद्दे पर ठोस और पारदर्शी कार्रवाई करनी होगी, ताकि वेंडर्स और शहर दोनों के हितों का संतुलन बना रहे।

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