Search

हरियाणा के किसानों की चांदी: मछली पालन पर मिल रही 60% सब्सिडी, जानें आवेदन का तरीका

Mar 16, 2026 1:22 PM

हरियाणा। हरियाणा की धरती अब केवल गेहूं और धान ही नहीं, बल्कि 'नीली क्रांति' के जरिए भी सोना उगल रही है। परंपरागत खेती के विकल्प के तौर पर उभरे मत्स्य पालन ने प्रदेश के किसानों की किस्मत बदल दी है। केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना' (PMMSY) ने इस क्षेत्र में नई जान फूंक दी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा मछली पालन में देश के टॉप राज्यों की सूची में दूसरे नंबर पर आ गया है। 2025-26 के वित्तीय वर्ष में प्रदेश के किसानों ने 2.04 लाख टन मछली का उत्पादन कर सबको चौंका दिया है। इसी रफ्तार को बनाए रखने के लिए सरकार अब मछली पालकों को खाद और खुराक जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भारी सब्सिडी मुहैया करा रही है।

सब्सिडी का गणित: महिलाओं और अनुसूचित जाति के लिए विशेष छूट

योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका सब्सिडी ढांचा है। यदि कोई किसान ताजे पानी में मछली पालन की नई यूनिट लगाता है, तो प्रति हेक्टेयर औसतन 4 लाख रुपये का खर्च आता है। इसमें सामान्य वर्ग के पुरुष किसानों को 40 प्रतिशत (करीब 1.60 लाख रुपये) की सीधी मदद दी जा रही है। वहीं, महिला लाभार्थियों और अनुसूचित जाति के किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान की राशि 60 प्रतिशत (करीब 2.40 लाख रुपये) तय की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि छोटे और सीमांत किसान भी इस मुनाफे वाली खेती से जुड़ें। इसके लिए मिश्रित मत्स्य, स्कैम्पी और तिलापिया जैसी अधिक मांग वाली प्रजातियों के पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

हिसार से करनाल तक फैला जाल: इन जिलों में बढ़ा रुझान

हरियाणा के वे जिले जो कभी पानी की कमी या खारे पानी की समस्या से जूझते थे, आज वे मछली पालन के गढ़ बन गए हैं। हिसार, भिवानी, सिरसा, रोहतक और करनाल में किसानों ने बड़े पैमाने पर तालाब खोदकर इस व्यवसाय को अपनाया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खारे पानी वाली जमीन, जहां फसलें नहीं हो पाती थीं, वहां मछली पालन किसानों के लिए 'व्हाइट गोल्ड' साबित हो रहा है। यही वजह है कि राज्य सरकार भी मत्स्य पालकों को बिजली दरों में रियायत और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएं देने पर काम कर रही है ताकि उत्पादन को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

आवेदन की प्रक्रिया: इन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत

योजना का लाभ उठाने के लिए हरियाणा के किसानों के पास 'परिवार पहचान पत्र' (PPP) होना अनिवार्य है। इसके अलावा आधार कार्ड की फोटोकॉपी, बैंक पासबुक का विवरण और जमीन के दस्तावेज आवेदन के लिए जरूरी हैं। मत्स्य विभाग ने आवेदन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था की है। विभाग का कहना है कि अनुदान की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के जरिए भेजी जाएगी, जिससे बिचौलियों का खेल खत्म होगा। अगर आप भी खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय का जरिया तलाश रहे हैं, तो मत्स्य विभाग के जिला कार्यालय में संपर्क कर इस योजना का हिस्सा बन सकते हैं।

You may also like:

Please Login to comment in the post!