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हरियाणा सरकार का कोटक महिंद्रा बैंक पर बड़ा एक्शन, 150 करोड़ के घोटाले के बाद पैनल से बाहर

Apr 09, 2026 10:42 AM

हरियाणा।  हरियाणा की सैनी सरकार ने पंचकूला नगर निगम में हुए 150 करोड़ रुपये के सनसनीखेज घोटाले को लेकर कोटक महिंद्रा बैंक के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। वित्त विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए इस निजी बैंक को अपनी अधिकृत सूची (पैनल) से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता की ओर से जारी आदेशों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अगले आदेश तक राज्य का कोई भी सरकारी महकमा कोटक महिंद्रा बैंक के साथ किसी भी तरह का वित्तीय व्यवहार नहीं करेगा।

बैंकों में जमा सरकारी पैसा तुरंत निकालने के निर्देश

सरकार ने केवल भविष्य के लेन-देन पर ही रोक नहीं लगाई है, बल्कि सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि बैंक में मौजूदा समय में जो भी सरकारी फंड जमा है, उसे तुरंत किसी अन्य अधिकृत बैंक में ट्रांसफर किया जाए। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि कोटक महिंद्रा बैंक में चल रहे सभी सरकारी खातों को अविलंब बंद किया जाए। सरकार का यह सख्त रुख निजी बैंकों के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है कि सरकारी धन की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मूलधन मिला पर ब्याज पर फंसा पेंच

चौतरफा दबाव और सरकारी सख्ती के बाद कोटक महिंद्रा बैंक ने 127 करोड़ रुपये की राशि राज्य सरकार के खाते में वापस तो जमा करा दी है, लेकिन मामला अभी सुलझा नहीं है। दरअसल, यह राशि केवल घोटाले का मूलधन है, जबकि सरकार अब उस पर बनने वाले करोड़ों रुपये के ब्याज की मांग कर रही है। बैंक की ओर से ब्याज चुकाने में की जा रही आनाकानी ने सरकार के तेवरों को और तल्ख कर दिया है। जब तक पाई-पाई का हिसाब चुकता नहीं होता, तब तक बैंक पर लगा यह प्रतिबंध हटने के आसार कम ही हैं।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की रडार पर बैंक के अधिकारी

इस पूरे खेल की जड़ें पंचकूला के सेक्टर-11 स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा से जुड़ी हैं। हरियाणा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) इस वित्तीय हेराफेरी की तह तक जाने के लिए बैंक के रिकॉर्ड खंगाल रही है। पुलिस ने इस मामले में बैंक के ब्रांच मैनेजर पुष्पेंद्र सिंह और रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप सिंह राघव को पहले ही सलाखों के पीछे भेज दिया है। जांच में इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि नगर निगम के फंड को नियमों को ताक पर रखकर इधर-उधर किया गया। सरकार अब इस मामले में अन्य बड़े चेहरों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

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