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हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले: सब्जियों की खेती पर 25 हजार तक की सब्सिडी, ऐसे करें आवेदन

Apr 01, 2026 5:17 PM

हरियाणा। हरियाणा सरकार की नई प्रोत्साहन नीति का असर अब खेतों में दिखने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान जैसी फसलों में जहां पानी की खपत ज्यादा और जोखिम अधिक है, वहीं सब्जियां 'कैश क्रॉप' (नकदी फसल) के रूप में उभर रही हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत दी जा रही इस सब्सिडी का मकसद उन किसानों को संबल देना है, जो अपनी जमीन के छोटे से हिस्से पर भी आधुनिक तकनीक से सब्जी उगाना चाहते हैं।


पानी की बचत और जेब की मजबूती: एक पंथ दो काज

कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में डार्क जोन की समस्या गहराती जा रही है। ऐसे में सूक्ष्म सिंचाई या टपका प्रणाली (Drip Irrigation) के साथ सब्जियों की खेती न केवल पानी बचाती है, बल्कि खाद और कीटनाशकों के खर्च को भी आधा कर देती है।

सब्जियों की मांग मंडियों में 12 महीने बनी रहती है, जिससे किसान को फसल तैयार होते ही नकद भुगतान मिल जाता है। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में गेमचेंजर साबित हो रहा है।

कैसे उठाएं लाभ? 'पहले आओ-पहले पाओ' का है फॉर्मूला

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल रखा है। कृषि अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सब्सिडी का वितरण 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर किया जाएगा।

पंजीकरण: इच्छुक किसानों को सबसे पहले hortharyana.gov.in पर अपना आवेदन करना होगा।

अनिवार्य शर्त: आवेदन से पूर्व किसान का 'मेरी फसल-मेरा ब्योरा' पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।

दस्तावेज: योजना के लिए फैमिली आईडी (PPP), आधार कार्ड, पैन कार्ड और जमीन की फर्द जैसे कागजात तैयार रखने होंगे।

सब्सिडी का गणित: किसको कितना मिलेगा?

सरकार ने सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी की दरों को वर्गीकृत किया है। सामान्य श्रेणी के प्रगतिशील किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये की मदद दी जा रही है। वहीं, अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए यह राशि बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति एकड़ तय की गई है। विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के बाद यह अनुदान राशि सीधे किसान के डीबीटी (DBT) लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

विशेषज्ञ की सलाह: तकनीकी खेती ही भविष्य

कृषि जानकारों का कहना है कि वर्तमान दौर में वही किसान मालामाल होगा जो बाजार की मांग को समझेगा। बेमौसम सब्जियों की खेती (Off-season Farming) और नेट हाउस तकनीक का इस्तेमाल कर किसान अपनी आय को दोगुना से भी ज्यादा कर सकते हैं। सरकार की यह सब्सिडी केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक खेती की ओर मोड़ने का एक बड़ा निवेश है।

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