हरियाणा नगर निगम चुनाव: हाई कोर्ट ने दी सरकार को राहत, आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
Apr 16, 2026 3:00 PM
हरियाणा। हरियाणा में स्थानीय निकाय चुनावों की बाट जोह रहे राजनीतिक गलियारों के लिए चंडीगढ़ से बड़ी खबर आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नगर निगमों में एससी आरक्षण के निर्धारण को चुनौती देने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार की उस विवादित प्रक्रिया पर भी संवैधानिक मुहर लग गई है, जिसमें जनगणना के पुराने आंकड़ों के बजाय 'फैमिली इंफॉर्मेशन डेटा रिपॉजिटरी' (FIDR) यानी परिवार पहचान पत्र के डेटा को आधार बनाया गया था।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा संवैधानिक संकट उस समय खड़ा हुआ जब पूर्व पार्षद उषा रानी समेत कई याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी मुख्य आपत्ति इस बात पर थी कि संविधान के अनुच्छेद 243-P के तहत 'जनसंख्या' का मतलब हमेशा 'अंतिम प्रकाशित जनगणना' (2011) के आंकड़ों से होता है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि हरियाणा सरकार ने 2023 और 2024 में हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में संशोधन कर डेटा का नया खेल शुरू किया, जो संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
डेटा बनाम संविधान की जंग
कोर्ट में बहस के दौरान सरकार की ओर से दलील दी गई कि 2011 की जनगणना काफी पुरानी हो चुकी है और सटीक आरक्षण के लिए परिवार सूचना डेटा (FIDR) कहीं अधिक पारदर्शी और अपडेटेड है। दूसरी तरफ, याचिकाकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से खिलवाड़ बताया था। उन्होंने पंचकूला नगर निगम के वार्ड परिसीमन को भी कठघरे में खड़ा किया था, जिसमें आरोप था कि जनता की आपत्तियों को सुने बिना ही रातों-रात अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई।
जल्द बज सकता है चुनावी बिगुल
हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब सरकार के पास नगर निगम चुनावों की घोषणा करने के लिए कोई कानूनी बाधा नहीं बची है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से न केवल पंचकूला, बल्कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर जैसे बड़े नगर निगमों में भी चुनाव का रास्ता खुल जाएगा। कोर्ट के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक सुधारों के तहत लिए गए 'डेटा-बेस्ड' फैसलों में हस्तक्षेप की गुंजाइश कम है। अब देखना यह होगा कि इस कानूनी राहत के बाद सरकार कितनी जल्दी चुनावी मैदान में उतरने का फैसला लेती है।