हरियाणा न्यायिक सेवा में बड़ा बदलाव, पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने बदला कानून
Apr 01, 2026 12:43 PM
हरियाणा। हरियाणा की न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से सैनी सरकार ने भर्ती नियमों में ऐतिहासिक संशोधन किया है। 'हरियाणा उच्च न्यायिक सेवा (संशोधन) नियम, 2026' के लागू होने के साथ ही अब पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है। नए ढांचे के तहत, उच्च न्यायिक सेवा के 50 प्रतिशत पदों को मेरिट और वरिष्ठता (Merit-cum-Seniority) के आधार पर पदोन्नति से भरा जाएगा। वहीं, बाकी बचे 50 प्रतिशत पदों को दो हिस्सों में बांटा गया है—25 प्रतिशत पद सीमित प्रतियोगी परीक्षा (Limited Competitive Examination) और शेष 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के जरिए भरे जाएंगे।
वकीलों के लिए कड़े हुए नियम: सिर्फ डिग्री से नहीं चलेगा काम
सीधी भर्ती के जरिए जज बनने का सपना देख रहे वकीलों के लिए अब राह उतनी आसान नहीं होगी। नए संशोधनों के मुताबिक, अभ्यर्थी को यह साबित करना होगा कि वह कानून के पेशे में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। इसके लिए कड़े आर्थिक और पेशेवर मापदंड तय किए गए हैं। अब आवेदन के लिए पिछले तीन वर्षों का आयकर दाता (Income Tax Payee) होना अनिवार्य है, जिसमें सालाना न्यूनतम आय 5 लाख रुपये होनी चाहिए। इतना ही नहीं, वकील को हर साल कम से कम 50 मामलों में अदालत के भीतर पैरवी करने का पुख्ता प्रमाण भी देना होगा। हालांकि, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को इन शर्तों में नियमानुसार आंशिक छूट दी जाएगी।
प्रमोशन के लिए भी कड़ी कसौटी: 7 साल का अनुभव और 35 की उम्र
न्यायिक सेवा के भीतर प्रमोशन की चाह रखने वाले अधिकारियों के लिए भी नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। सीमित प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से पदोन्नति पाने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही, न्यायिक अधिकारी के रूप में कम से कम 7 वर्ष का कार्य अनुभव अनिवार्य किया गया है। सरकार का मानना है कि इन कड़े नियमों से न्यायपालिका में अनुभवी और कुशल लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ आम जनता को त्वरित न्याय के रूप में मिलेगा।
पारदर्शिता का 'रोस्टर' कवच: खत्म होगा वरिष्ठता का विवाद
भर्ती प्रक्रिया को विवादों से दूर रखने के लिए सरकार ने 'रोस्टर सिस्टम' को कानूनी जामा पहनाया है। अब हर 4 पदों की भर्ती एक तय पैटर्न पर होगी, जिसमें पहले दो पद प्रमोशन से, तीसरा पद प्रतियोगी परीक्षा से और चौथा पद सीधी भर्ती से भरा जाएगा। यह साइकिल इसी क्रम में चलती रहेगी। वरिष्ठता निर्धारण के नियमों को भी इस तरह से परिभाषित किया गया है कि यदि किसी कारणवश भर्ती प्रक्रिया में देरी होती है, तो भी अधिकारियों की सीनियरिटी को लेकर कोई कानूनी अड़चन या आपसी खींचतान पैदा न हो। 27 मार्च 2026 से प्रभावी हुए ये नियम हरियाणा की कानूनी व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत माने जा रहे हैं।